क्या पेरोल पर रिहा होगा डेढ साल से हत्या में कैद ये बेजुबान (हाथी) जानवर , जाने वजह – उत्तर प्रदेश

क्या पेरोल पर रिहा होगा डेढ साल से हत्या में कैद ये बेजुबान (हाथी) जानवर , जाने वजह

एक बेजुबान जानवर का दर्द एक वर्दी वाले रहम दिल इंसान की वजह से दूर होने वाला है। हत्या के मामले में सजा काट रहे मिट्ठू नाम के हाथी की रिहाई के रास्ते तलाशे जा रहे हैं।

उसे पेरोल दिलाने पर भी विचार किया जा रहा है। अदालती अड़ंगा नहीं लगा तो जल्द ही जंजीरों में जकड़ा यह बेजुबान आजाद होगा और दुधवा नेशनल के जंगलों में खुले आसमान के नीचे सांस ले सकेगा। 

मामला चंदौली जिले का है। यहां डेढ़ साल पहले 20 अक्तूबर 2019 को इस हाथी ने रामाशंकर नाम के शख्स की जान ले ली थी। रामाशंकर के परिजनों ने हाथी और हाथी के महावत के ऊपर बबुरी थाने में हत्या का मुकदमा कर दिया।

हाथी और महावत दोनों गिरफ्तार हो गए। महावत को जेल भेज दिया गया और हाथी को वाराणसी के रामनगर स्थित वन्य जीव संरक्षण विभाग में कैद कर दिया गया।

हाथी के चारों पैरों में लोहे की मोटी जंजीर बांध दी गई। महावत को कुछ दिन बाद जमानत मिल गई लेकिन हाथी की जमानत लेने वाला कोई न था। जमानत के लिए अर्जी जरुर डाली गई लेकिन इतेफाक ऐसा कि इस बेजुबान की सुनवाई लॉकडाउन की वजह से दो बार टल गई। 

हर दिन की खुराक 1000 रुपये आती है
रामनगर के वन्य जीव संरक्षण के रिकार्ड में इस हाथी को हर दिन एक हजार रुपये की खुराक दी जाती है। इसमें पांच किलो आटा, पांच किलो चावल, दो किलो गुड़, आधा किलो दाल और एक किलो चना खिलाया जाता है।

हाथी की सेवा करने के लिए दो लोगों को रखा गया है जिन्हें 201 रुपये प्रति दिन दिया जाता है। डेढ़ साल से कैद इस हाथी पर लिखा पढ़ी में साढ़े पांच लाख रुपये खुराक पर खर्च हो गए।

हाथी को देखने वाले बताते हैं कि वह पहले से न सिर्फ कमजोर हो गया है बल्कि उसके पैरों में जंजीरों के निशान पड़ गए हैं। हाथी आखिरी बार कब बैठा था, यह किसी ने नहीं देखा।

इस खबर पर वाराणसी के पुलिस कमिश्नर ए सतीश गणेश की नजर पड़ी। हालांकि मामला उनके कार्यक्षेत्र का नहीं था फिर भी उन्होंने इस बेजुबान का दर्द समझते हुए पहले वन विभाग के अधिकारियों से बात की।

फिर अपने पुराने साथी और चिड़िया घर के डायरेक्टर रमेश पांडेय को न सिर्फ पूरी कहानी बताई बल्कि उसे किसी भी कीमत पर आजाद कराने के लिए पैरवी की बात भी कही। क्योंकि मामला अदालत में है। हाथी रामाशंकर की हत्या का मुख्य किरदार है।

ऐसे में सीधे तौर पर हाथी को छोड़ने में कई दांव पेंच हैं। मसलन किसी जज ने हाथी को ही कोर्ट में पेश करने का हुक्म दे दिया तो पुलिस हाथी को कहां ढूंढेगी।

ऐसे में अब बीच का रास्ता निकालते हुए हाथी को पेरोल देने को लेकर कानून की किताबें खंगाली जा रही है, ताकि शासन में फाइल जाए तो क्वेरी लग कर वापस न आ जाए। हाथी के रिहाई की बात बनी तो इसे दुधवा नेशनल पार्क में ले जाकर छोड़ा जाएगा।

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