उत्तराखंड : कोराना के चलते बाजपुर के फूल उत्पादक निराश, मुरझा गए दो करोड़ के फूल – उत्तराखंड

उत्तराखंड : कोराना के चलते बाजपुर के फूल उत्पादक निराश, मुरझा गए दो करोड़ के फूल

कोरोना महामारी ने हर क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया है। इस दौरान फूलों की खेती करने वाले किसान भी निराश और मायूस हैं। मार्च 2020 से लेकर आज तक फूलों की मांग न के बराबर है। किसानों की मानें तो जनपद के फूल कारोबारियों को एक वर्ष में दो करोड़ का नुकसान हुआ है ।

कोरोना के चलते खेती-किसानी भी प्रभावित है
ऊधमसिंह नगर में लगभग 50 किसान धान, गेहू ,गन्ने की खेती छोड़कर फूलों की खेती कर रहे हैं, जिन्हें कोरोनाकाल में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है कोरोना संक्रमण की मार से फूल के साथ ही खेती करने वाले के चेहरे भी मुरझा गए हैंं।

किसानों का कहना है कि इस बार फूलों की खपत नहीं हो पाई। पौधों को बचाने के लिए फूल तोड़कर फेंकने पड़े। या फिर सात से 40 रुपये तक बिकने वाले फूल मात्र दस प्रतिशत दाम पर बेचने पड़े।

दवा का खर्च भी नहरीं निकल पाया, लाभ कमाना तो दूर की बात है। लॉकडाउन के दौरान शादी समारोहों से लेकर अन्य आयोजनों संक्षिप्त हो गए।

ऐसे में फूलों की डिमांड एक तरह से खत्म ही हो गई। किसी ने डेकोरेशन या अन्य किसी उपयोग के लिए फूलों का आर्डर ही नहीं दिया। दिल्ली सरीखे महानगरों से भी कोई ऑर्डर नहीं मिले।

फूल कारोबारी मायूस
उत्तराखंड फूलों की खेती के लिए दिल्ली सहित अनेक महानगरों में जाना जाता है और हर वर्ष ऊधमसिंह नगर के किसान राजभवन में लगने वाली पुष्प प्रदर्शनी में पुरस्कार जीत कर आते हैं। इस वर्ष बल्देव राज ने यह पुरस्कार जीता।

बाजपुर विकास खंड के ग्राम जोगीपुरा निवासी फूल व्यवसाई, हंसराज कंबोज, मुख्यत्यार ङ्क्षसह कंबोज, बल्देव राज कंबोज ने बताया कि वह वर्ष 2006 से फूलों व बागवानी कर रहे हैं।

ऐसे हालात कभी नहीं हुए। उनका परिवार फूलों से ही लगभग दस लाख की आमदनी करता था, वर्तमान में चार लाख रुपये का खर्च घर से देना पड़ रहा है।

इन फूलों की होती है खेती
तराई में रुद्रपुर के किसान किशन लाल ठुकराल चालीस रुपये प्रति फूल पैराडाइज तो अन्य जगह बेगलोर की प्रजाति जरवेरा फूलों के 26 रंगों के फूल उगाए जाते हैं। इसी प्रकार गुलादरी,रेडरोज,लीलियम, रजनीगंधा, गेंदा और केलांडयुला सहित कई फूल उगाए जाते है।

यह सब शाही शादियों, भव्य आयोजनों में इस्तेमाल होते हैं। लगभग नब्बे प्रतिशत फूल दिल्ली मंडी जाते हैं लेकिन आज वहां से भी डिमांड निल है। कोरोना के चलते दिल्ली में लगभग 13 माह से कोई खरीददार नहीं है।

फूल कारोबारी अपना उत्पाद फेंक रहे हैं या एक-दो रुपये पीस में लोगों को बेचना पड़ रहा है। कई किसान तो रखरखाव कर पाने की हालत में भी नहीं हैं।

आरके सिंह, उद्यान निरीक्षक बाजपुर ने बताया कि जनपद में लगभग 47 फूल उत्पादक हैं, जो अच्छी प्रजाति के फूल उगाते हैं। कई को उद्यान विभाग ने पॉलीहाउस में अनुदान दिया गया है।

गत वर्ष बाजपुर विकासखंड में लगभग 75 जबकि जनपद में डेढ करोड़ का नुकसान हुआ था। आकलन शासन को भेजा गया है। इस बार भी हालत नहीं बदले तो नुकसान तय हैै। मांग न के बराबर है।

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