'UP बना हेट पॉलिटिक्स का अड्डा': CM योगी को पूर्व अधिकारियों ने लिखा इस कानून के खिलाफ पत्र – News

‘UP बना हेट पॉलिटिक्स का अड्डा’: CM योगी को पूर्व अधिकारियों ने लिखा इस कानून के खिलाफ पत्र

उत्तर प्रदेश में लागू हुआ लव-जिहाद कानून यानी धर्मांतरण विरोधी अध्यादेश को लेकर भाजपा शासित राज्यों में घमासान मचा हुआ है। राज्य में बवाल मचा हुआ है।

पिछले एक महीने में इस कानून के कारण 51 गिरफ्तारियां हुईं जबकि 49 को जेल और 14 केस दर्ज किए गए हैं।

अब इसी कानून को लेकर राज्य के 100 से अधिक पूर्व नौकरशाहों ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होने यूपी को नफ़रत की राजनीति का केंद्र बताते हुए कहा है कि धर्मांतरण विरोधी अध्यादेश ने राज्य को ‘घृणा, विभाजन और कट्टरता की राजनीति का केंद्र बना दिया है। इसके साथ ही इन पूर्व नौकरशाहों ने इस कानून को तुरंत वापस लेने की मांग की है।

ये अधिकारी हैं शामिल: इस पत्र को लिखने में पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन, पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव और प्रधानमंत्री के पूर्व सलाहकार टी. के. ए. नैयर समेत 104 रिटायर्ड आईएएस अफ़सर शामिल हैं।

इन सभी ने ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध क़ानून, 2020’ को वापस लेने की मांग की है। इन सभी का कहना है कि इस क़ानून के कारण यूपी नफ़रत, विभाजन और कट्टरता की राजनीति का केंद्र बन गया है।

क्या है पत्र में: इस पत्र में लिखा गया है कि उत्तर प्रदेश एक समय में गंगा-जमुना तहज़ीब को सींचने वाला था, लेकिन अब लव-जिहाद कानून के आने के बाद से यहां नफ़रत, विभाजन…कट्टरता की राजनीति का पनप चुकी है।

इसके साथ ही इन रिटायर्ड अफसरों ने इसे पूरी तरह से ग़ैर-क़ानूनी बताया है। इसके साथ ही उन्होंने लिखा है कि यह कानून खास तौर पर अल्पसंख्यक लोगों/समुदाय के खिलाफ साजिश है। यह कानून उन्हें परेशान करने के लिए बनाया गया है।

उन्होंने लिखा है कि इस कानून का नाम यानी ‘लव जिहाद’ राइट विंग विचारधारा रखने वालों ने दिया है। इसमें कथित तौर पर मुस्लिम पुरुष हिंदू महिलाओं को बहलाकर शादी करते हैं और फिर उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाते हैं। ये सिर्फ कहानी है। यह एक तरफा अत्याचार है जो युवाओं के खिलाफ आपके प्रशासन ने किया है।

पत्र में कोर्ट का हवाला: इतना ही नहीं इन पूर्व अधिकारियों ने इस पत्र में इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी का हवाला दिया है। जिसमें कहा गया है कि अगर लड़का और लड़की नाबालिग है और खुद की मर्जी से शादी कर रहे हैं, तो इसमें कहीं से भी कोई अपराध नहीं है।

उन्होंने बताया कि यह फैसला कोर्ट ने पिछले महीने दिया था, जिसमें किसी के व्यक्तिगत रिश्तों में दखल देना स्वतंत्रता के अधिकार का हनन है।

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