अदूरदर्शी भारतीय जनता में चेतना जागृत करता किसान आंदोलन। – News

अदूरदर्शी भारतीय जनता में चेतना जागृत करता किसान आंदोलन।

किसान शब्द सुनते ही भारत की गांव याद आती है। वहीं आज अखिलेश यादव ने किसान महापंचायत में कहा भी “दिल्ली में बैठे तानाशाह ग्रामीण किसान का दर्द नही समझ सकते और अगर आप अपना दर्द सुनने दिल्ली जाएंगे तो रास्तों में क़िले ठोक दी जाएंगी, आंसू गैस के गोले दागे जायेंगे, पानी की बौछारें की जाती है।”

यह सरकार आमिर व्यापारियों की है ये किसानो और ग्रामीण निवासियों को अनपढ़ गंवार समझती है। वर्त्तमान किसान आन्दोलन ने अच्छे-अच्छे बुद्धजीवियों के ज्ञान चक्षु खुलने लगे है यही कारण हो सकता है कि किसान महापंचायत के मंच पर अब सभी सभी अपनी आवाज़ उठाने लगे है। मजदूरों के सभी कानून केंद्र सरकार ने खत्म कर दिये लेकिन उनकी आवाज़ किसी ने नहीं उठाई न ही किसी ने आंदोलन किया।

भारत की सर्वश्रेष्ठ तीन यूनीवर्सितियों जेएनयू,एएमयू और जामिया के छात्रों पर हमले हुए लेकिन कार्यवाही के नाम पर मात्र भाषणबाजी हुई।JNU हिंसा की घटना पर अभी तक पुलिस ने किसी को भी गिरफ्तार नहीं किया है।

महंगाई अपने चरम पर है, शिक्षा व्यवस्था गड्ढे में जा रही है जबकि शिक्षण शुल्क में बढ़ोत्तरी हो रही है। अगर इन मुद्दों को लेकर छात्र प्रदर्शन करते है तो उनको अर्बन नक्सल या देश द्रोही कहा जाता है। एक-एक कर के सारे सार्वजनिक उपक्रम, रेल, सेल, गेल, एयरपोर्ट, ऐतिहासिक इमारतें सब गिरवी रख कर कथित देश चला रहे है और टीवी पर नेता जनता को विश्व गुरु होने का सपना दिखा रहे है।

अगर देश में कोई विरोध होता दिखाई दे तो ध्यान भटकने के लिए मीडिया कथित तौर पर प्रोपोगंडा चलाकर सत्ता से नही जानता से सवाल-जवाब करती है।
सारे स्थायी पद खत्म कर के ठेके की नौकरी लाई जा रही है। ठेके की नौकरी केवल गुलामी का दूसरा नाम है जहां नौकरी की कोई गारन्टी नही है न कोई सुविधा न भारत के संविधान में दिये गये समान कार्य का समान वेतन का अधिकार।

सारे सिविल कर्मचारियों की पेंशन, जीपीएफ आदि खत्म हो गये,पर सरकार बिल्कुल सामान्य रूप से चल रही है किसी को अपने भविष्य की चिंता नही है।
ऐसे समाज और देश मे किसन एकजुट हो कर इतने लम्बे समय से ,तमाम दिक्कतों के बाद भी मजबूती से खड़े है। 200 से ज्यादा शहादत देने के बाद भी न केवल अपने अधिकारो के लिये ही नही बल्कि हम सबके लिये आंदोलनरत हैं क्योंकि कृषि कानूनों को लेकर पहले सरकार ने कहा कोई गुंजाइस नही फिर बोली सुधार की जरूरत है।

इससे साफ है कि सरकार की नीति किसानो को समझ में आ गई है। वे समझ गए है की सरकार कथित पूंजीपतियों की गुलाम है। जो खुद के दम पर व्यपार में दिवालिया है लेकिन सरकार की मदद से जनता के पैसो पर अपना कथित व्यपार चमका रहे है।

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