धोखाधड़ी के मामले में RTI एक्टिविस्ट हरेंद्र ढींगरा और उनके दोनों बेटे गिरफ्तार – Delhi NCR

धोखाधड़ी के मामले में RTI एक्टिविस्ट हरेंद्र ढींगरा और उनके दोनों बेटे गिरफ्तार

आरटीआई एक्टिविस्ट हरेंद्र ढींगरा व उनके परिवार पर 15 करोड़ रुपये गबन का आरोप लगा है। पुलिस का कहना है कि हरेन्द्र ढींगरा और उनके पूरे परिवार ने मिलकर एक ही प्रॉपर्टी पर दो बैंकों से लोन ले लिया और फिर वापस नहीं किया।

सोमवार को डीएलएफ फेज-1 थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।  

इस पूरे मामले में RTI एक्टिविस्ट हरेन्द्र धींगरा और उसके दोनों बेटों तरुण और प्रशांत धींगरा को गुरुग्राम पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और पूरे मामले की जांच कर रही है.

पुलिस के अनुसार 16 अप्रैल को पुलिस को एक शिकायत मिली कि हरेंद्र धींगरा, उनकी पत्नी पूनम, बेटे प्रशांत व तरुण ने अपने प्लॉट डीएलएफ फेज-1 प्लॉट नंबर 7/डी-4 पर साल 2003 में मैसर्स एलीगेंस फेबरिक्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से करोड़ों रुपये का लोन लेकर बैंक को लोन का पैसा नहीं किया।

इसी प्लॉट को दोबारा से ओबीसी बैंक में गिरवी रखकर इन्होंने अपनी नई कंपनी तरुण एक्सपोर्ट्स के नाम से करोड़ों रुपये का दोबारा लोन ले लिया।

लोन लेने के बाद रुपये इस प्लॉट को हरेंद्र धींगड़ा ने बेटे तरुण, प्रशांत व पोते गर्व के नाम पर ब्लड रिलेशन के तहत ट्रांसफर कर दिया. ऐसा कर बैंकों से लोन की राशि गबन की गई।

गुरुग्राम पुलिस का दावा है कि इस पूरे मामले में एसीपी स्तर के अधिकारी जांच की जिसमें पता चला कि हरेंद्र व पत्नी पूनम ने साल 2001 में प्रदीप कुमार से यह प्लॉट खरीदा था. दोनों इस प्रॉपर्टी के आधे-आधे मालिक थे।

साल 2003 में इंडियन ओवरसीज बैंक से महिला पूनम व बेटे प्रशांत ने अपनी कंपनी मैसर्स एलीगेंस फेबरिक्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से अलग-अलग लोन लिया और उसमें पर्सनल गारंटी दी।

ये लोन एनपीए होने के बाद परिवार ने आपस में साजिश रचकर प्रशांत धींगरा ने अपने माता-पिता के खिलाफ लोक अदालत में इस प्लॉट विवाद के लिए दावा डाल दिया।

27 नवंबर 2006 को लोक अदालत के आदेशानुसार इस प्लॉट को दंपत्ती ने अपने बेटे प्रशांत के नाम कर दिया। फिर प्रशांत ने साल 2007 में अपनी फर्म तरुण एक्सपोर्ट्स के नाम पर ओबीसी बैंक में इस प्लॉट को गिरवी रखकर करीब 8 करोड़ का लोन ले लिया।

लोन न भरने पर साल 2008 में ये प्लॉट एनपीए हो गया।

दोनों बैंकों ने लोन न भरने पर आरोपित को नोटिस भेजा. आरोपितों ने प्रशांत के बेटे गर्व के नाम से प्लॉट पर दावा गुरुग्राम कोर्ट में डाल दिया।

साथ ही लोक अदालत के आदेश को रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की. याचिका पर हाईकोर्ट ने 8 फरवरी 2016 को गुरूग्राम लोक अदालत के आदेश को रद्द किया और प्लॉट वापस आरटीआई एक्टिविस्ट हरेंद्र धींगड़ा के नाम आ गया।

पुलिस ने इस मामले में एसीपी क्राइम टू की अगुवाई में एक एसआईटी का गठन किया है. यह एसआईटी अब मामले में आगामी जांच कर रही है।

पुलिस का आरोप है कि हरेन्द्र धींगरा अपने साथी रविंद्र यादव के साथ मिलकर वो आरटीआई एक्ट का नाजायज फादया उठाकर लोगों पर दबाव बनाकर पैसे ऐंठते है।

2017 में भी हरेंद्र के खिलाफ सदर थाना में एफआईआर दर्ज की गई थी। जिसका चालान तैयार कर कोर्ट में पेश किया जा चुका है। हरेंद्र ने रविंद्र के साथ मिलकर डीएलएफ के प्लॉटों पर कब्जा करने का आरोप लगाया है।

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