राजस्थान : आधुनिक मशीनीकरण के कारण मिट्टी के बर्तनों की बिक्री पर पड़ा भारी असर – राजस्थान

राजस्थान : आधुनिक मशीनीकरण के कारण मिट्टी के बर्तनों की बिक्री पर पड़ा भारी असर

आधुनिक मशीनीकरण के युग में शिक्षित युवाओं को तो बेरोजगार किया ही है वहीं छोटे तबके के मजदूरों की रोजी रोटी पड़ भी ग्रहण लगता नजर आ रहा है ।

जहाँ गर्मी के मौसम में लोग मिट्टी से निर्मित मटकों में भरे ठंडे पानी का लुफ्त लेते थे वहीं अब बाजारों में रेफ्रिजरेटर आ जाने से कस्बे में मिट्टी के बने बर्तनों की बिक्री पर खासा असर पड़ा है

जिससे मिट्टी के बर्तन व्यवसायी प्रजापत समाज के लोगों को अब चिंता सताने लगी है । वहीं डीग कस्बे में 60 से 70 प्रजापत परिवार इसी व्यवसाय में लगे हैं और इसके अलावा और कोई रोजी रोटी का स्रोत नहीं है ।

इसी तरह गत वर्ष कोरोना काल के समय बाहरी क्षेत्रों में आवागमन बंद होने से भी असर इन व्यवसायियों के धंधे पर पड़ा था जबकि उपखंड क्षेत्र के अलावा मिट्टी के बर्तनों की माँग रहती है । वहीं इसी व्यवसाय में वर्षों से लगी प्रजापत समाज की एक वृद्ध महिला ने बताया कि पहले घरों में मिट्टी के बर्तनों की काफी माँग रहती थी , और अच्छे भावों में मटके बिकते थे , वहीं अब बाजार में रेफ्रिजरेटर आने से मटकों की बिक्री में बहुत कमी आयी है । महिला ने बताया कि अब दिनभर में मुश्किल से 2 या 4 मटके ही बिक पाते हैं जिससे साग सब्जी के लायक भी आमदनी नहीं हो पाती है ।

वहीं प्रजापत समाज के लोगों का कहना है कि पीढ़ियों से वे लोग मिट्टी के बर्तन बनाने का व्यवसाय करते आ रहे हैं लेकिन अब मशीनीकरण ने मजदूर वर्ग के हाथ काट दिए हैं , उनका कहना है कि जहाँ एक ओर रेफ्रिजरेटर , प्लास्टिक जैसी चीजों के वर्तमान में अधिक प्रचलन से मिट्टी से निर्मित बर्तनों की माँग दिनों दिन घट रही है वहीं दूसरी ओर ये समाज धीरे – धीरे बेरोजगार हो रहे हैं और उनकी रोजी रोटी के लाले भी पड़ रहे हैं ।

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