ह्यूस्टन में एक तरफ 'हाउडी मोदी' तो दूसरी तरफ सिख पुलिस अफसर की हत्या पर दोनों नेताओ की ख़ामोशी क्यों ? – लोकप्रिय ख़बरें

ह्यूस्टन में एक तरफ ‘हाउडी मोदी’ तो दूसरी तरफ सिख पुलिस अफसर की हत्या पर दोनों नेताओ की ख़ामोशी क्यों ?

राजनीती देश के अंदर हो या बाहर हो पार्टियां वही करती है जो उनकी पार्टी, कार्यकर्ताओ एवं प्रायोजकों के फायदे के लिए हो। जबकि जनता का नाम तो यूँही लिया जाता है।

नस्लीय भेदवाद केवल अमेरिका में ही नहीं बल्कि अब वैश्विक चिंता का विषय बन गया है जिसमे अपने देश को छोड़ कर विदेशों में नौकरी करने वाले, व्यापर करने वाले, घूमने जाने वालों से लेकर पढ़ाई करने वाले हिंसा के शिकार बनते हैं।

वैसे अमेरिका में केवल भारतीय ही नहीं बल्कि, अफ़्रीकी, लैटिन अमेरिका के लोग, और दूसरे एशियाई देशों के नागरिक भी नस्लीय भेदभाव के शिकार होते रहे हैं. हाल ही में सिखों और मुस्लिम लोगों के प्रति नस्लीय घटनाओं में भी काफी बढ़ोतरी हुई है।

अमेरिका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन कैंपेन के बाद नस्लीय हिंसा में निर्णायक बढ़त हुई है –

कुछ बड़ी घटनाएं…

  • सितम्बर 2019 : 28 अमेरिका के जिस शहर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को भारत-अमेरिका की दोस्ती का संदेश दिया था, वहां से कुछ ही दूर पर एक अमेरिकी सिख पुलिस ऑफिसर की गोली मारकर नृशंस हत्या कर दी गई।
  • फरवरी 2017 : 27 साल का VC रेड्डी को कैलिफ़ोर्निया में गोली मरी गयी, इस घटना में उनकी मौत हो गई थी।
  • नवम्बर 2016 : गुरनूर सिंह नहल, भारतीय सिख छात्र को कैलिफोनिया में गोली मरी गयी जिसमें उसके मौत हो गयी थी।
  • जुलाई 2015 : एक बुजुर्ग अमेरिकन भारतीय को न्यू जर्सी में पीटा गया, और सड़क पर लहुलूहान करके छोड़ा गया।
  • फरवरी 2015: वेस्ट कोस्ट के एक हिन्दू मंदिर और स्कूल में तोड़फोड़ की गयी और नस्लीय टिप्पणियां दीवारों पर लिखी गयी।
  • अक्टूबर 2014: वर्जीनिया पुलिस के मुताबिक जुलाई से अब तक इस इलाके में 17 केस तोड़फोड़ और नस्लीय हिंसा के दर्ज किये गए हैं।
  • सितम्बर 2013: कोलंबिया यूनिवर्सिटी के एक सिख प्रोफेसर को भीड़ ने पीटा और उन्हें ओसामा और आतंकवादी कहा गया।
  • अगस्त 2013: एक 80-साल के सिख को ट्रिनिटी में ब्रिटिश लड़की के द्वारा पिटा गया।
  • जुलाई 2013: गुरुद्वारे में तोड़फोड़ कि घटना हुई।
  • अगस्त 2012: एक बंदूकधारी ने विस्कोंसिन में सिखों के धार्मिक स्थल पर हमला कर के 6 लोगों को मौत के घाट उतरा।

ये कुछ ऐसी घटनाएं है जो मीडिया में काफी हाईलाइट हुयी थी। इसके अलावा न जाने कितनी ऐसी घटनाये है जिनकी सूचना हम तक नहीं पहुंच पाती है।

ऑस्टिन में टेक्सॅस यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के प्रोफेसर रॉबर्ट जेनसेन के अनुसार, ‘‘अमेरिका में चुनावी व्यवस्था काफी हद तक दो दलीय प्रणाली के पक्ष में झुकी है, लेकिन इस देश की राजनीति में तीसरे दलों का भी लंबा और महत्वपूर्ण इतिहास रहा है।

अमेरिका के दूसरे राष्ट्रपति जॉन एडम्स ने एक बार कहा था कि इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है कि यह देश ‘‘दो राजनीतिक दलों के बीच बंट जाए, हरेक अपने नेता के तहत व्यवस्थित और पार्टियां एक-दूसरे के विरोध में काम करती रहें। विनम्रता के साथ मेरा मानना है कि यह संविधान के तहत सबसे बड़ी राजनीतिक बुराई होगी।’’

‘हाउडी मोदी’ प्रोग्राम एक राजनैतिक उद्देश्य के लिए

अमेरिका के ह्यूस्टन में आज आयोजित ‘हाउडी मोदी’ इवेंट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत और भारतीय अमेरिकियों को केंद्र में रखकर करीब आधे घंटे तक भाषणबाजी हुयी। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि विश्व की ऊर्जा राजधानी में आयोजित इस कार्यक्रम से दोनों लोकतंत्रों के संबंधों को नई ऊर्जा के बारे में बताया।

अमेरिका में भारतीयों कि हत्या पर क्यों खामोशी ?

साल 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर भारत का घनिष्ठ मित्र होने का वादा करने वाले ट्रंप केवल ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ह्यूस्टन गए। भारत के प्रधानमंत्री इस प्रोग्राम के लिए मुख्य व्यक्ति थे।

जब अमेरिका भारत को घनिष्ट मित्र बताता है तभी प्रोग्राम स्थल से कुछ दूरी पर एक भारतीय सिख  संदीप धालीवाल की हत्या की जाती है। उसके दूसरे दिन दोनों देश के दिग्गज नेताओं ने इस घटना पर कोई प्रतक्रिया नहीं दिया इससे एक बार सवाल जरूर उठता है। कि भारतीयो का प्रयोग केवल वोट पाने के लिए है।

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