संविदा के नाम पर आरक्षित वर्ग को किनारे करने की तैयारी : गरीब, पिछड़े आरक्षिति नौजवान में बढ़ेगी बेकरी। – News

संविदा के नाम पर आरक्षित वर्ग को किनारे करने की तैयारी : गरीब, पिछड़े आरक्षिति नौजवान में बढ़ेगी बेकरी।

  • समूह ‘ख’ व ‘ग’ की भर्ती प्रक्रिया में बड़े बदलाव की तैयारी में प्रदेश सरकार
  • हर छह माह पर मूल्यांकन, हर वर्ष में 60 प्रतिशत से कम अंक तो नौकरी से बाहर 
  • पांच वर्ष की कठिन संविदा प्रक्रिया में छंटनी से बचे तभी पक्की नौकरी की सौगात

भारत की यह एक अजीब विडंबना है कि आजादी के 70 साल बाद भी जातिवाद पूरी तरह से व्याप्त है सरकारी पदों पर एक छोटा सा चपरासी से लेकर शीर्ष पर बैठे अधिकारी तक कथित जातिवाद पराकाष्ठा में समंलिप्त है।

जिन्दा तो छोड़िये साहेब मृत्यु के बाद जब मुर्दे को भी जाति के नाम पर श्मशान घाट में अंतिम संस्कार करने से रोक दिया जाता है तो आप इसका अंदाजा लगा सकते है। फिर भी अगर कम है समाचार पत्रों के पन्नों पर छपी ख़बरों पर गौर करके आकलन करे देखे आज प्रताड़ित होने वाला और करने वाला कौन है ?

आरक्षण उनका होकर भी उनका नहीं हुआ और उनकी दशा वही रही

आजद भारत में बराबरी हक़ के लिए आरक्षण की व्यवस्था कि गई ताकि ताकि वे समाज भी सर उठाकर जी जिन्हे अछूत कहा जाता रहा है। लेकिन कागज़ के टुकड़े पर लिखा आरक्षण उनको न मिल सका आज आरक्षित वर्ग पर अनारक्षित लोग का कब्ज़ा है। जब भी उन्होंने अपना हक़ माँगा तो उन्हें या तो गालिया मिली या लाठियां प्रदर्शन करने पर उन्हें मिली धमकियाँ।

संविदा के नाम पर आरक्षण को ख़त्म करने की कोशिस

सरकारी नौकरियों में संविदा के नाम पर सरकार को पिछड़ा अनुसूचित जाति जनजाति को आरक्षण देने एवं नौकरी में रखने की बाध्यता से मुक्ति मिल जाएगी या यूं कहें कि सरकार को खुलेआम यह करने की छूट मिल जाएगी कि वह किसे नौकरी दें और किसे ना दे। इससे पहले भी संविदा के नाम पर यही होता रहा है। परिणाम आपके सामने है सभी पड़े पदों पर ठाकुर, पंडित, वैश्य ही आपको मिलेंगे।

संविदा के नाम पाने रिश्तेदारों की नियुक्त ही किया करते थे एक आरक्षण का डर था जिसके कारण उन्हें पिछड़े, अनुसूचित और अनुसूचित जनजाति के लोगो को रखना पड़ता था। लेकिन संविदा की नौकरियों पर ऐसे कोई कानून की व्यवस्था नहीं अब टेंडर भी उन्हें मिलेगा और नौकरी भी उन्ही की इस तरह 100 % हक़ केवल 14 % लोगों के हाँथ में होगा।

बता दे कि उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों (Government Job) में भर्ती को लेकर योगी सरकार बदलाव करने जा रही है। इसके तहत समूह ‘ख’ व ‘ग’ की भर्तियों में चयन के बाद पांच वर्ष तक संविदा कर्मचारी के तौर पर काम करना होगा।

इस दौरान हर छह माह में कर्मचारी का मूल्यांकन किया जाएगा और साल में 60 फ़ीसदी से कम अंक पाने वाले सेवा से बाहर हो जाएंगे। लिहाजा पांच साल बाद उन्हीं कर्मचारी को नियमित सेवा में रखा जाएगा जिन्हें 60 फ़ीसदी अंक मिलेंगे। इस दौरान कर्मचारियों को नियमित सेवकों की तरह मिलने वाले अनुमन्य सेवा संबंधी लाभ नहीं मिलेंगे।

पांच वर्ष की कठिन संविदा सेवा के दौरान जो छंटनी से बच पाएंगे उन्हें ही मौलिक नियुक्ति मिल सकेगी। शासन का कार्मिक विभाग इस प्रस्ताव को कैबिनेट के समक्ष विचार के लिए लाने की तैयारी कर रहा है। इस प्रस्ताव पर विभागों से राय मशविरा शुरू कर दिया गया है।

नियमित होने पर वह नियमानुसार अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हैं। पर, प्रस्तावित पांच वर्ष की संविदा भर्ती और इसके बाद मौलिक नियुक्ति की कार्यवाही से समूह ‘ख’ व ‘ग’ की पूरी भर्ती प्रक्रिया ही बदल जाएगी। नई व्यवस्था में तय फार्मूले पर इनका छमाही मूल्यांकन होगा। इसमें प्रतिवर्ष 60 प्रतिशत से कम अंक पाने वाले सेवा से बाहर होते रहेंगे। जो पांच वर्ष की सेवा तय शर्तों के साथ पूरी कर सकेंगे, उन्हें मौलिक नियुक्ति दी जाएगी। 

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