वाराणसी में सड़कों पर दम तोड़ रहे मरीज, गोरखपुर में दिन-रात जल रहीं चिताएं – भारत

वाराणसी में सड़कों पर दम तोड़ रहे मरीज, गोरखपुर में दिन-रात जल रहीं चिताएं

उत्तर प्रदेश में कोरोना का कहर बढ़ता ही जा रहा है। मरीजों को अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहे। जिन्हें मिल रहे हैं वे ऑक्सीजन की कमी से दम तोड़ रहे हैं। बनारस, गोरखपुर और लखनऊ से लेकर राज्य के लगभग हर अस्पताल में बड़ी संख्या में वेंटिलेटर का संकट है।

वाराणसी में हालात ये हैं कि सभी अस्पताल कोरोना मरीजों से भर गए हैं। अब नए मरीजों को आसानी से बेड मिलना मुश्किल हो गया है। अस्पतालों में बेड के साथ वेंटिलेटर और ऑक्सीजन का संकट भी गहराता जा रहा है।

गोरखपुर: अस्पताल की चौखटों पर ही दम तोड़ रहे मरीज
गोरखपुर में हर दिन अस्पतालों की चौखटों पर बेड मिलने के इंतजार में मरीज दम तोड़ रहे हैं जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए कुल 1,500 बेड हैं, जिनमें से रोजाना करीब 15 बेड खाली होते हैं। जबकि, भर्ती होने वालों की लिस्ट लंबी होती है।

इनमें से करीब 10% मरीजों को वेंटिलेटर वाले बेड की भी जरूरत है, लेकिन वह भी नहीं मिलते। सरकारी आंकड़ों में भले ही मरने वालों की संख्या कम होती है, लेकिन श्मशान घाट और कब्रिस्तानों में दिन-रात अंतिम संस्कार चल रहे हैं।

लखनऊ : 10 दिनों में 1,500 से ज्यादा अंतिम संस्कार
राजधानी लखनऊ में भले ही नए मरीजों की संख्या कम होने लगी है, लेकिन अस्पतालों और श्मशान घाटों का नजारा पहले की तरह बना हुआ है।

यहां घाटों पर आज भी शवों की लंबी कतारें लग रहीं हैं। दिन-रात अंतिम संस्कार हो रहा। जब इसके वीडियो वायरल हुए तो सरकार ने घाटों पर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर ही रोक लगा दी। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद सरकार ने अपना फैसला वापस ले लिया

कानपुर : एक महीने बाद भी कतारें कम नहीं हुईं
कानपुर में भी हालात बेहद खराब हैं। यहां सुबह 7 बजे भैरवघाट श्मशान घाट पर कोरोना संक्रमित सीआई त्रिपाठी का शव लेकर उनके बेटे अमितेश पहुंचे थे।

उन्होंने बताया कि वे सुबह जल्दी आए फिर भी लाइन लगानी पड़ी। वे लगभग 2 घंटे बाद अंतिम संस्कार कर पाए। उनके पिता का कोरोना से निधन हो गया था।

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