कोरोना से ठीक होने के बाद म्यूकोरमाइकोसिस का खतरा, दिमाग तक पहुंच कर जान ले रहा है ये फंगस। – Delhi NCR

कोरोना से ठीक होने के बाद म्यूकोरमाइकोसिस का खतरा, दिमाग तक पहुंच कर जान ले रहा है ये फंगस।

कोरोना के बाद अब म्यूकोरमाइकोसिस फंगस कमजोर इम्यूनिटी वालों के लिए खतरा बना हुआ है। कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों में म्यूकोरमाइकोसिस का इन्फेक्शन देखा जा रहा है। पिछले कुछ दिनों में गंगाराम अस्पताल में ऐसे 6 मरीज एडमिट हुए हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि यह बहुत रेयर इन्फेक्शन है, लेकिन अभी इसके मामले पहले की तुलना में बढ़ गए हैं। नाक से शुरू होने वाला यह फंगस इन्फेक्शन आंख और ब्रेन तक पहुंच जाता है और जानलेवा भी हो सकता है। डॉक्टर इसके बढ़ने की वजह अभी स्टेरॉइड्स के बहुत ज्यादा इस्तेमाल को भी मान रहे हैं।

मैक्स के कोविड एक्सपर्ट डॉक्टर रोमेल टिक्कू ने कहा कि जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, उनमें म्यूकोरमाइकोसिस फंगल इन्फेक्शन होने का खतरा ज्यादा रहता है। वहीं डायबिटिक, कैंसर, ट्रांसप्लांट, एचआईवी के पेशंट और जो लोग स्टेरॉइड्स या ऑक्सिजन पर होते हैं, उनमें इस संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है।

म्यूकोरमाइकोसिस का क्या है इलाज

डॉक्टर अजय ने कहा कि ऐसे मरीज का तुरंत एमआरआई और सीटी स्कैन कराना होता है। उसके आधार पर आगे का इलाज तय होता है। ईएनटी एक्सपर्ट की जरूरत होती है। कई बार जबड़ा भी प्रभावित हो जाता है, तो उसे निकालने की नौबत आ जाती है। इसका इलाज बहुत लंबा चलता है।

क्या है म्यूकोरमाइकोसिस इन्फेक्शन

म्यूकोरमाइकोसिस एक तरह का फंगल इन्फेक्शन है। इसे ब्लैक फंगस भी कहा जाता है। इसका असर नाक, आंख, ब्रेन और लंग्स पर देखा जाता है। ब्लैक फंगस होने पर लोगों की आंखों की रोशनी चली जाती है।

ज्यादा बढ़ने पर इससे कुछ मरीजों के जबड़े और नाक की हड्डी भी गल जाती है। समय रहते अगर मरीज ठीक न हो तो मौत भी हो सकती है। इस बारे में पिछले दिनों नीति आयोग सदस्य डॉक्टर वी के पॉल ने कहा था कि म्यूकोरमाइकोसिस फंगस की बीमारी ‘म्यूकॉर’ नामक फंगल से होती है, जो शरीर में ज्यादातर गीली सतहों पर पाया जाता है।

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