कैसे मिलेगा न्याय जब सरकार ही हो दलित विरोधी, गुना कांड की जांच कर रहे SC आयोग अध्यक्ष के ऑफिस में ताला लगवाया ! – भोपाल

कैसे मिलेगा न्याय जब सरकार ही हो दलित विरोधी, गुना कांड की जांच कर रहे SC आयोग अध्यक्ष के ऑफिस में ताला लगवाया !

मध्य प्रदेश में पिछड़े दलित और आदिवासी किसानों की स्थिति क्या है और सरकार इनके लिए कितना चिंतित है इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि गुना कांड की जांच करने वाले एससी आयोग के अध्यक्ष के ऑफिस में ताला लगा दिया गया।

इतना ही नहीं ग्वालियर की वह घटना तो आपको याद ही होगी जब किसानों पर गोलियां चली थी उस घटना की फोटो सोशल मीडिया और मीडिया में सरेआम वायरल यह सब एकदम साफ दिख रहा था उसके बाद सत्ता में जब तक शिवराज सिंह चौहान की सरकार थी तब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई।

एक बार ऐसी ही घटना को दोहराते हुए फिर दोबारा वही नजारा सामने आया। जब गुना में पुलिस वालों ने एक दलित दंपत्ति को पूरी तरह से पीट दिया।

घटना में माना जा रहा है कि पुलिस की लापरवाही और गलती थी लेकिन न्याय ना दिलाने के बजाय सरकार अब न्याय की जांच करने वालों के ही ऑफिस में ताला लगा रही है। इससे तो साफ जाहिर होता है कि सरकार के मन में दलितों के प्रति क्या है।

केंद्र में ताकतवर सत्ता पक्ष यानि भारतीय जनता पार्टी हर तरीके से लोकतंत्र को अपनी मुठ्ठी में कैद करने पर आमादा है। देश भर में खरीद-फरोख्त के माध्यम से सत्ता पर काबिज होने पर आतुर बीजेपी की सरकारें संवैधानिक पदों पर भी तानाशाही करने से बाज नहीं आ रही है।

ताजा मामला मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का है जहां अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन को उनके कार्यालय में बैठने से रोक दिया गया। गलत तरीके से सचिव के माध्यम से ताला डलवा दिया।

सागर के पूर्व सांसद और मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष डॉ. आनंद अहिरवार को उनके ऑफिस में ही बैठने से रोक दिया गया। जब वह सुबह दफ्तर पहुंचे तो वहां पर ताला पड़ा था। आयोग के सेक्रेटरी ने कहा कि मुझसे कहा गया है कि आपको ऑफिस में न बैठने दिया जाए।

लिखित आदेश की कॉपी दिखाओ: डॉक्टर आनंद के मुताबिक जब उन्होंने सचिव से लिखित आदेश की मांग की तो उन्हें बताया गया कि आदेश मौखिक है। इसके बाद डॉक्टर आनंद कार्यालय से चले गए, लेकिन उन्होंने अपने साथ हुए इस व्यवहार के बारे में राज्य अनुसूचित जाति आयोग के आयुक्त को पत्र लिखा है।

पत्र में उन्होंने बकायदा स्पष्ट करने को कहा है कि कार्यालय में ताला डालने का यदि कोई लिखित आदेश है तो उन्हें इसकी कॉपी भेजी जाए।

हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना: डॉक्टर आनंद अहिरवार ने बताया कि हाईकोर्ट की तरफ से उनके पद को लेकर स्टे दिया गया है और दूसरी तरफ अब तक उनसे किसी और ने राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष का चार्ज भी नहीं लिया है।

ऐसे में कार्यालय में ताला लगाने का कृत्य गलत है और हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना है क्योंकि कोर्ट से उन्हें अनुमति मिली है कि फिलहाल वो इस पद पर रह सकते हैं। सरकार डबल बेंच चली गई, लेकिन वहां भी यथास्थिति बनाए रखने को कहा था।

डॉक्टर आनंद अहिरवार पूर्व सांसद हैं और कमलनाथ सरकार में आयोग के अध्यक्ष बने थे। राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त डॉक्टर आनंद ने गुना जाकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी और इसको लेकर मुख्यमंत्री शिवराज को पत्र भी लिखा था।

पत्र में उन्होंने दलित परिवार को आर्थिक सहायता देने और दलित परिवार के एक व्यक्ति को शासकीय नौकरी देने की बात लिखी थी।

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