कोविड-19 के आंकड़ों को दर्ज करने में होती है समय की बर्बादी, निजी प्रयोगशालाओं ने कहा – भारत

कोविड-19 के आंकड़ों को दर्ज करने में होती है समय की बर्बादी, निजी प्रयोगशालाओं ने कहा

नयी दिल्ली, 13 अप्रैल दिल्ली में कोरोना वायरस के मामलों में बढ़ोतरी के बीच पहले से ज्यादा जांच कर रही निजी प्रयोगशालाओं ने कहा है कि आईसीएमआर की वेबसाइट पर डाटा अपलोड करने में बहुत वक्त जाया हो रहा है।

दिल्ली हवाई अड्डे पर कोविड-19 की जांच का काम देख रही जेनेस्ट्रिंग लैब की डॉ गौरी अग्रवाल ने कहा कि प्रयोगशाला में हर दिन करीब 8000 नमूनों की जांच की जा रही है।

उन्होंने कहा, ”कर्मियों की उपलब्धता और डाटा दर्ज करना एक बड़ी चुनौती है। अगर कोई कर्मी संक्रमित हो जाता है तो पूरे सिस्टम को फिर से व्यवस्थित करना पड़ता है।”

अग्रवाल ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण चीज भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की वेबसाइट पर डाटा दर्ज करने और राज्य सरकार के साथ इसे साझा करने में बहुत समय जाया होता है।

हालांकि, उन्होंने कहा कि प्रयोशालाएं इस बार पहले से बेहतर तैयारी की स्थिति में है।

डॉ. डांग लैब के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ अर्जुन डांग ने बताया कि अक्टूबर और नवंबर की तुलना में वर्तमान में दोगुणा नमूनों की जांच की जा रही है।

उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी प्रयोगशालाएं हर किसी को सेवा नहीं मुहैया करा पा रही है क्योंकि संसाधन बहुत सीमित हैं।

डॉ. डांग ने सुझाव दिया कि सरकार डाटा संग्रह को स्वचालित बना सकती है क्योंकि आईसीएमआर के पोर्टल पर आंकड़े दर्ज करने में बहुत कर्मियों को लगाना पड़ता है और वक्त की बर्बादी होती है।

बहरहाल, कोर डायग्नोस्टिक्टस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिनेश चौहान ने कहा, ”वर्तमान में हम अपनी ज्यादातर रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर दे देते हैं। स्वचालित प्रणाली में निवेश के कारण डाटा प्रबंधन और मामले दर्ज करने की प्रक्रिया सुगम बनी है।

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