नए संसद भवन का शिलान्यास गरीब देश की अमीर संसद का हिंसक और अश्लील प्रदर्शन – सम्पादकीय

नए संसद भवन का शिलान्यास गरीब देश की अमीर संसद का हिंसक और अश्लील प्रदर्शन

भारत के नए संसद भवन का शिलान्यास उस वक्त किया गया है जब सुप्रीम कोर्ट ने इसके निर्माण पर रोक लगा रखी है खींचतान कर अदालत से सरकार ने इस भूमि पूजन की और शिलान्यास की इजाजत ली थी और आज देश की बदहाली के बीच हजार करोड़ के बजट वाली यह इमारत बनाने पर सरकार आमदा है।

मौजूदा संसद भवन एक सदी पुराना भी नहीं है और इसे छोटा बताया जा रहा है देश का मीडिया लिख रहा है कि दुनिया के बहुत से देशों में संसद की इमारत सदियों पुरानी है अमेरिका की संसद भवन सन 1800 सो में बनी है और उसे 2 सदी से अधिक हो गए भारत का संसद भवन 1927 में बनकर तैयार हुआ था और अब इसे छोटा बता कर एक नया ही भवन बनाया जा रहा है.

अभी जब सुप्रीम कोर्ट ने इस भवन निर्माण पर रोक लगाई हुई है तो जाहिर है कि शिलान्यास और भूमि पूजन करके निर्माण करने की कोई हड़बड़ी तो नहीं थी ऐसे में जब किसान इसी दिल्ली के किनारे सड़कों पर धरना दिए हुए हैं और खुली ठंड में पड़े हैं वहां कुछ मौतें भी हो गई हैं आज देश में चारों तरफ एक ही मुद्दे पर चर्चा चल रही है और वह किसानों का मुद्दा है इस बीच नए संसद भवन को बनाने के लिए समारोहपूर्वक पूजा का मौका कुछ अटपटा है।

ऐसा लगता है कि किसी भी संवेदनशील लोकतंत्र को आज इससे बचना चाहिए था अब कहने के लिए कहा जा सकता है कि संसद भवन के लिए शिलान्यास का फैसला लोकसभा अध्यक्ष का है जो संसद परिसर के मुख्य माने जाते हैं आज अंग्रेजों के वक्त के बनाए गए सड़क और रेल के पुल तो 100 बरस बाद भी मजबूती के साथ काम कर रहे हैं इसलिए संसद भवन की मजबूती को लेकर कोई शक नहीं हो सकता।

पिछले कई दशकों में ऐसा भी सुनाई पड़ा कि संसद भवन का कोई हिस्सा जर्जर होकर गिर गया हो और वह लोगों के लिए खतरा बन गया हो इसलिए नए संसद भवन की सोच पहली नजर में हमें एक बहुत बड़ी फिजूलखर्ची लगती है आज जब देश में फटेहाली है गरीबी और बेरोजगारी है जब अन्नदाता किसान सड़कों पर मर रहा है।

ऐसे में संसद भवन का निर्माण निहायत गैरजरूरी और नाजायज है हजार करोड़ की लागत से यह संसद भवन बनाया जा रहा है लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों की गिनती करें तो प्रति सांसद इस भवन की लागत करीब एक सवा करोड़ रुपए आएगी प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी सूचना में सरकार ने यह कहा कि नए संसद भवन आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण का एक हिस्सा रहेगा इसी बयान में बताया गया है।

लोकसभा अपने मौजूदा आकार से 3 गुना बड़ी रहेगी और राज्यसभा भी पर्याप्त बड़ी रहेगी यह भी कहा गया है कि सदस्यों के लिए बैठने का और अधिक आरामदेह इंतजाम रहेगा अब सवाल यह है कि सांसदों को और कितने आराम की जरूरत है जब देश में आराम हराम हो की नौबत है जब हर हिस्से में तरह तरह की नकारात्मक बातें हो रही है तो उनकी चर्चा करने के लिए सांसदों को और कितना आराम चाहिए।

आपको यह जानकार आश्चर्य होगा 1 फ़ीसदी ऐसे रहीस है जिनके पास देश की 58 फ़ीसदी दौलत है उन से परे भी गरीबों और मध्यवर्गीयो के बीच बहुत बड़ा फासला है इसलिए इस देश को किफायत की जरूरत है ना कि ऐसी आत्मनिर्भरता की जिसका इस्तेमाल अगले सौ 200 वर्ष भी शायद ना हो सके जब देश की जनता पूरी जिंदगी रेलगाड़ियों में फर्श पर बैठकर या पाखाने में घुसकर सफर करने को मजबूर है तब लोकसभा में जरूरत पड़ने पर मौजूदा भवन की ही क्षमता कुछ बढ़ाई जा सकती है गरीब देश की अमीर संसद का यह प्रदर्शन हिंसक और अश्लील है

लेख : डॉक्टर मतलूब अंसारी

Vairochan Media (Opc) Private Limited

Subscribe To Our Newsletter

[mc4wp_form id="319"]