कुत्ता और बिल्ली तक की गिनती होती है तो पिछड़ों की क्यों नहीं, इनकी असली आबादी से किसको डर है : लालू यादव – News

कुत्ता और बिल्ली तक की गिनती होती है तो पिछड़ों की क्यों नहीं, इनकी असली आबादी से किसको डर है : लालू यादव

लालू प्रसाद यादव ने जनगणना में पिछड़ों और अति पिछड़ों की गिनती नहीं किए जाने पर फिर सवाल उठाया है। उन्होंने मंगलवार रात 2019 के ट्वीट को री-ट्वीट किया है। कहा कि केंद्र सरकार जनगणना में कुत्ता-बिल्ली, हाथी-घोड़ा, सियार-सूअर सब की गिनती करती है तो पिछड़े और अति पिछड़ों की गिनती करने में क्या परेशानी है?

उन्होंने पूछा है कि जनगणना में एक अलग जाति का कॉलम जोड़ने में क्या दिक्कत है? क्या जातिगत जनगणना करेंगे तो 10 फीसदी की 90 प्रतिशत पर हुकूमत की पोल खुल जाएगी?

लालू ने कहा कि NPR (राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर), NRC (राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर) और 2021 की भारतीय जनगणना पर लाखों करोड़ खर्च होंगे। सुना है NPR में कई अलग-अलग कॉलम जोड़ रहे हैं, लेकिन इसमें जातिगत जनगणना का एक कॉलम और जोड़ने में क्या दिक्कत है? क्या 5,000 से अधिक जातियों वाले 60 प्रतिशत अनगिनत पिछड़े-अति पिछड़े हिंदी नहीं हैं, जो आप उनकी गणना नहीं चाहते?

पिछड़ों को 36 फीसदी रिजर्वेशन मिलना चाहिए

राजद के वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार मणि ने कहा है कि 1931 के बाद से देश में जातीय जनगणना नहीं हुई है। गृह विभाग ने इस आधार पर जनगणना कराई भी, लेकिन उसे बहुत विश्वसनीय नहीं माना जा सकता। इसलिए जातीय जनगणना जरूरी है। उन्होंने कहा कि न्यायपूर्ण निर्णय लेने के लिए यह जरूरी है, क्योंकि जाति के आधार पर कई बड़े निर्णय लिए जाते हैं।

प्रेम कुमार मणि ने कहा कि सामान्य वर्ग को दो-तिहाई रिजर्वेशन मिल रहा है, इस हिसाब से पिछड़ों को 27 फीसदी के बजाय 36 फीसदी रिजर्वेशन मिलना चाहिए, लेकिन लोग इसे नहीं समझ रहे। इसलिए जरूरी है कि जातीय जनगणना हो। इसी से सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा।

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