गुरु तेग बहादुर के 30 अनुयायियों की शहादत के बाद भी नहीं पसीजा दिल्ली शहंशाह का दिल – News

गुरु तेग बहादुर के 30 अनुयायियों की शहादत के बाद भी नहीं पसीजा दिल्ली शहंशाह का दिल

गुरु तेग बहादुर सिखों के नौवें गुरु को समर्पित दिल्ली के चांदनी चौक का गुरुद्वारा शीशगंज गुरुद्वारा साहिब के नाम से जाना जाता है। दिल्ली के चांदनी चौक पर मुगल बादशाह औरंगजेब के आदेश पर गुरु तेग बहादुर का सिर काट दिया गया था।

उस समय कई लोग ने औरंगजेब के खौफ में अपना धर्म परिवर्तित किया था। औरंगजेब ने गुरु तेग बहादुर को भी धर्म परिवर्तन का आदेश दिया था, लेकिन सिखों के गुरु ने इस आदेश को नहीं माना और 11 नवंबर 1675 को इस्लाम में परिवर्तित होने के लिए मना कर दिया।

आज एक बार फिर इतिहास की झलक दिखाई दे रही है। किसान नए कृषि कानून को वापस करने की मांग को लेकर दिल्ली बॉर्डर पर पिछले 33 दिनों से बैठा हुआ है। पहले दिल्ली केंद्र की शहंशाह सरकार पानी के बौछारे करवाई, कई जगह लाठिया भी चली इससे भी काम नहीं चला तो उन्हें अपमानित करने का सडयंत्र कथित मीडिया और नेताओ द्वारा शुरू हुआ।

कुछ ने उनको खालिस्तानी बताया तो कुछ उन्हें देश विरोधी टुकड़े टुकड़े गैंग का समर्थक, वे नेता जिनके पास खुद की भ्रष्ट कमाई का कोई सबूत नहीं है वे किसानो की रोटी पर सवाल उठाने लगे है।

जब इतने से भी काम नहीं चला और दिल्ली के शहंशाह लगा कि सियासत तेज होगी और हमें अपनी राज गद्दी से हाथ धोना पड़ सकता है। तो नाटकीय रूप से किसानो पर मुक़दमा लिखवाने वाले गुरुद्वारा और लंगर में जाने लगे आश्चर्य की बात यह है कि अभी भी दिल्ली के शहंशाह का घमंड बरकरार है जबकि किसान गुरु तेग बहादुर की तरह बलिदान होने के लिए तैयार है।

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