बांदा : कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसरों की नियुक्ति पर हंगामा, 16 में से 11 एक ही जाति के – बाँदा

बांदा : कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसरों की नियुक्ति पर हंगामा, 16 में से 11 एक ही जाति के

सिद्धार्थनगर के सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी के भाई की असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य अभ्यर्थी) कोटे में नियुक्ति का विवाद थमा ही था कि बांदा कृषि विश्वविद्यालय में की गईं नियुक्तियों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

सामान्य कोटे में यहां नियुक्त हुए 16 प्रोफेसरोंं में 11 के ठाकुर बिरादरी से होने का आरोप है। इन नियुक्तियों से पहले इसके विज्ञापन में रोस्टर आरक्षण की अनदेखी का आरोप लगा तिंदवारी के भाजपा विधायक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को छह फरवरी को पत्र लिख चुके थे।

मामला
बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में शिक्षक वर्ग के 40 रिक्त पदों की भर्ती के लिए फरवरी 2021 में विज्ञप्ति निकाली गई थी। सामान्य कोटे में जिस जाति विशेष के ज्यादातर अभ्यर्थियों की नियुक्ति का आरोप लग रहा है, उनमें 10 पूर्वांचल के निवासी बताए जा रहे हैं।

चर्चा के मुताबिक विवि के कुलपति कुलपति डा. यूएस गौतम वाराणसी के रहने वाले हैं। चयनित प्रोफेसर भी जौनपुर, गाजीपुर, सुलतानपुर व वाराणसी के बताए जाते हैं।

विश्वविद्यालय के निदेशक (प्रशासन) डा. बीके सिंह ने बताया कि गृह विज्ञान, उद्यान सहित कुछ अन्य महाविद्यालयों में इन सभी पदों की विज्ञप्ति निकालकर भर्ती की गई है। सरकार से अनुमति के बाद ही परिणाम निकाला गया था।

40 में से 24 अभ्यर्थी ही अर्हता पूरी कर पाए। इनमें सामान्य वर्ग के 20 पद शामिल हैं। इस वर्ग में 16 पदों पर नियुक्ति हुई। नियुक्ति पात्रता व अर्हता के आधार पर ही हुई है।

जाति विशेष को वरीयता देने का सवाल नहीं उठता है। आरोप निराधार है। योग्य व्यक्तियों का ही चयन किया गया है। एक जून को इस शिक्षक भर्ती का रिजल्ट निकला।

ताख पर रख दिए गए नियम
भर्ती के नियम में भी छेड़छाड़ की बात भी सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक भर्ती के लिए 80 अंक अकादमिक और 20 अंक साक्षात्कार के निर्धारित होते हैं। यही शासनादेश है, लेकिन भर्ती 70 अंक अकादमिक व 30 अंक साक्षात्कार के कर की गई है।

भाजपा विधायक का ये है कहना
तिंदवारी से भाजपा विधायक बृजेश प्रजापति ने कहा कि नियुक्तियां गलत तरीके से हुई हैं। रोस्टर का पालन नहीं होने से आरक्षण के मानक पूरे नहीं हुए, जिससे पात्र लोगों को लाभ नहीं मिला सका।

यह पूरी नियुक्ति गलत है, इसे रद कर फिर से प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। इसके लिए मुख्यमंत्री और राज्यपाल तक को पत्र लिखा है। मैं जाति व क्षेत्रवाद की राजनीति नहीं करता। बुंदेलखंड में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है।

अगर नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से होती तो यहां के लोगों को भी मौका मिलता। कुछ लोगों को अनुचित लाभ देने के लिए ही भर्ती गलत तरीके से की गई है। इसकी जांच होनी चाहिए, जो भी दोषी हो, उस पर कार्रवाई हो।

इनकी हुई नियुक्ति 

  • डा.आनंद सिंह, फल विज्ञान
  • डा.अजीत सिंह, वनस्पति विज्ञान
  • डा.शैलेश सिंह, बीज प्रौद्योगिकी
  • डा.अखिलेश सिंह, कीट विज्ञान
  • डा.शरद सिंह, शस्य विज्ञान
  • डा.वंदना सिंह, मानव विकास एवं मानव खोज
  • डा.एस गौतम, कृषि अर्थशास्त्र 
  • डा.ब्रजेंद्र कुमार सिंह, फल विज्ञान
  • डा.मनीष कुमार सिंह, वनस्पति विज्ञान 
  • डा.अमित सिंह, कटाई उपरांत प्रौद्योगिकी
  • डा.आशुतोष, बायोकेमेस्ट्री
  • डा.धीरेंद्र कुमार सिंह, आनुवांशिक एवं पादप प्रजनन
  • डा.योगेश, फोरेस्ट प्रोडक्ट यूटीलाइजेशन
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