बलिया : नर्स मरीजों के बाहरी जख्म से लेकर उनकी संवेदनाओं पर भी मरहम लगाती हैं। – बलिया

बलिया : नर्स मरीजों के बाहरी जख्म से लेकर उनकी संवेदनाओं पर भी मरहम लगाती हैं।

बलिया। नर्सों को इस पेशे से जुड़ी खुशियों के साथ-साथ कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। मरीज को ठीक करने में नर्सों का योगदान साठ फीसद होता है जबकि डाक्टरों का योगदान 40 फीसद होता है।

नर्स एक मां, एक बहन के रूप में मरीजों की सेवा करती हैं। इस रिश्ते को बखूबी निभाने के कारण इन्हें सिस्टर का उपनाम दिया गया है। नर्स मरीजों के बाहरी जख्म से लेकर उनकी संवेदनाओं पर भी मरहम लगाती हैं।

आधुनिक नर्सिंग की जननी कही जाने वाली फ्लोरेंस नाइटिगेल भी मरीजों की सेवा परिवार से बढ़कर करती थीं। इसलिए उनके जन्म दिन में प्रत्येक वर्ष 12 मई को अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया जाता है।

इसी क्रम में रसड़ा सीएचसी में तैनात माया, निकिता, रिंकू, ममता, पूनम के साथ सभी नर्सों को इस पुनीत अवसर पर हमारा न्यूज चैनल सैल्यूट करता है।

बताते चलें कि
हर साल 12 मई को अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया जाता है। साल 1820 में इसी दिन, फ्लोरेंस नाइटिंगेल, दुनिया की सबसे प्रसिद्ध नर्स का जन्म हुआ था। वह एक इंग्लिश नर्स, एक समाज सुधारक और एक स्टैटस्टिशन थीं, जिन्होंने आधुनिक नर्सिंग के प्रमुख स्तंभों की स्थापना की।
आज दुनियाभर के ज़्यादातर देश कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस, इस भयंकर महामारी के बीच, ख़ास महत्व रखता है। नर्स अस्पतालों और क्लीनिकों की रीढ़ की हड्डी होती हैं, जो अपनी जान जोखिम में डालकर महीनों तक करने का एक शानदार अवसर है।

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