महारष्ट्र का CM उद्धव ठाकरे के बनते ही भीमा कोरेगांव का केस NIA को क्यों ?

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महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले की राज्य की पुलिस कर रही थी, परंतु अचानक ही केंद्र सरकार ने NIA से जांच कराने का निर्णय लिया। इस पर मैंने बतौर गृहमंत्री आपत्ति जताई थी।

मेरा मानना है कि कोरेगांव-भीमा हिंसा मामले की जांच NIA को सौंपने पहले राज्य सरकार को सूचना होनी चाहिए थी, लेकिन केंद्र सरकार ने कोई जानकारी नहीं दी।

पवार ने कोल्हापुर में कहा कि महाराष्ट्र में कानून और व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। ऐसे अगर इस मामले में NIA जांच करती है तो यह राज्य के अधिकार में हस्तक्षेप होगा और उनके हाथ में जांच सौंपना महाराष्ट्र के लिए सही नहीं है।

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भीमा-कोरगांव हिंसा मामले आज पुणे कोर्ट का फैसला आनेवाला है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एसआर नवांदर ने पिछले सप्ताह इसपर सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था।

बता दें कि 1 जनवरी, 2018 को पुणे के भीमा-कोरेगांव में हिंसा हुई थी। दलित समुदाय के लोग 250 साल पहले हुई दलितों और मराठाओं के बीच हुई लड़ाई में दलितों की जीत का जश्न मनाने के लिए वहां हर साल इकट्ठा होते हैं। पुलिस का आरोप था कि कार्यक्रम के आयोजकों के नक्सलियों से संबंध थे।

बीते साल अगस्त और सितंबर में 10 एक्टिविस्ट्स को गिरफ्तार किया गया था। सभी आरोपी ट्रायल का सामना कर रहे हैं. हाल ही में एनसीपी नेताओं ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) से मुलाकात कर भीमा कोरेगांव हिंसा के आरोपियों के खिलाफ दर्ज किए गए सभी मामलों को बंद करने की मांग की थी।

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