ख़िलजी की उन राजपूत रानियों की कहानी, जिन्हे इतिहास में भुलाया जा रहा है ? – News

ख़िलजी की उन राजपूत रानियों की कहानी, जिन्हे इतिहास में भुलाया जा रहा है ?

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वर्तमान में लव जिहाद को लेकर कई संगठन सड़को पर उत्तर रहे है लेकिन सवाल उठता है कि इतिहस से लेकर वर्तमान तक लव जिहाद के नाम पर आम इंसान और गरीब प्यार करने वालों को ही क्यों निशाना बनाया गया।

इतिहास के बड़े- बड़े रजवाड़ों ने अपनी राज्य और अपनी शान के मुस्लिमो से रिश्तेदारी संधि किया। लेकिन जब कोई समाज का आम ब्यक्ति किसी गौर धर्म से शादी करता है तो प्राचीन में भी ज़माना उसका दुश्मन होता था आज भी वही है।

1296 में दिल्ली के सुल्तान बने अलाउद्दीन ख़िलजी के जीवन के रिकॉर्ड मौजूद हैं जिनसे पता चलता है कि ख़िलजी की चार पत्नियां थीं जिनमें से एक राजपूत राजा की पूर्व पत्नी और दूसरी यादव राजा की बेटी थीं।

कमला देवी, गुजरात के राजपूत राजा की पत्नी

1299 में ख़िलजी की सेनाओं ने गुजरात पर बड़ा हमला किया था। इस हमले में गुजरात के वाघेला राजपूत राजा कर्ण वाघेला (जिन्हें कर्णदेव और राय कर्ण भी कहा गया है) की बुरी हार हुई थी। इस हार में कर्ण ने अपने साम्राज्य और संपत्तियों के अलावा अपनी पत्नी को भी गंवा दिया था। तुर्कों की गुजरात विजय से वाघेला राजवंश का अंत हो गया था और गुजरात के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ा था।

कर्ण की पत्नी कमला देवी से अलाउद्दीन ख़िलजी ने विवाह कर लिया था। गुजरात के प्रसिद्ध इतिहासकार मरकंद मेहता कहते हैं, “ख़िलजी के कमला देवी से विवाह करने के साक्ष्य मिलते हैं।” मरकंद मेहता कहते हैं, “पद्मनाभ ने 1455-1456 में कान्हणदे प्रबंध लिखी थी जो ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित थी। इसमें भी राजपूत राजा कर्ण की कहानी का वर्णन है।”

मेहता कहते हैं, “पद्मनाभ ने राजस्थान के सूत्रों का संदर्भ लिया है और उनके लेखों की ऐतिहासिक मान्यता है। इस किताब में गुजरात पर अलाउद्दीन ख़िलजी के हमले का विस्तार से वर्णन है।” मेहता कहते हैं, ख़िलजी की सेना ने गुजरात के बंदरगाहों को लूटा था, कई शहरों को नेस्तानाबूद कर दिया था।

1308 में कर्ण सिंह को शरण देने के कारण अलाउद्दीन खिलजी के गुलाम मलिक काफूर ने गुजरात के नियंत्रक अल्प खान के सहयोग से देवगिरि के राजा रामचंद्र पर आक्रमण किया और बगलाना से उसकी पत्नी कमला देवी को उठा ले गया।

एक और दिलचस्प बात ये पता चलती है कि अलाउद्दीन ख़िलजी के हरम में रह रहीं कमला देवी ने उनसे अपनी बिछड़ी हुई बेटी देवल देवी को लाने का आग्रह किया था। खिलजी की सेनाओं ने बाद में जब दक्कन में देवगिरी पर मलिक काफ़ूर के नेतृत्व में हमला किया तो वो देवल देवी को लेकर दिल्ली लौटीं। अलाउद्दीन खिलजी ने कमला देवी से शादी कर ली और देवल की शादी अपने बेटे खिज्र खान से करवा दी।

1316 तक दिल्ली के सुल्तान रहे अलाउद्दीन ख़िलजी ने कई छोटी राजपूत रियासतों पर हमले कर या तो उन्हें सल्तनत में शामिल कर लिया था या अपने अधीन कर लिया था।

अय्यास खिलजी जिसे महिलाओ से अधिक पुरूषों में था इंट्रेस्ट

कुछ इतिहासकार मानते हैं कि हिन्दू परिवार में जन्मा काफूर जन्म से किन्नर था लेकिन ज्यादातर इतिहासकार मानते हैं कि खिलजी ने काफूर को नपुंसक बनाकर उसे मुसलमान बनवाया था। बहरहाल काफूर केवल खिलजी का प्रेमी नहीं था वो एक बहादुर योद्धा भी था।

उसने खिलजी के लिए मंगोलों के साथ और दक्षिण भारत में महत्वपूर्ण युद्धों में हिस्सा लिया। इतिहास की किताबों में दर्ज है कि खलनायक सुल्तान खिलजी के नायब ने दक्षिण भारत में जमकर मार-काट मचाई और कई हिंदू राज्यों पर कब्जे के लिए लगातार आक्रमण करता गया।

मलिक काफूर ने दक्षिण भारत के कई मंदिरों को नुकसान पहुंचाया। मदुरे के पौराणिक और मशहूर मीनाक्षी मंदिर को भी अलाउद्दीन खिलजी के भरोसेमंद मलिक काफूर ने तहस-नहस कर दिया था और लूट की मोटी रकम के साथ दिल्ली लौट गया था।

प्रतीकात्मक फोटो

लेखक जियाउद्दीन बरनी के मुताबिक काफूर से खिलजी को इतना प्यार था कि उसने काफूर को अपनी सल्तनत में दूसरा सबसे अहम ओहदा मलिक नायब का दिया था।

खिलजी ने जब दौलत के लिए दक्षिण भारत पर आक्रमण का फैसला किया तो उसकी जिम्मेदारी मलिक काफूर को ही दी गई। खिलजी के हुक्म पर मलिक काफूर ने दक्षिण भारत के कई इलाकों में जमकर मारकाट और लूटपाट की।

मलिक काफूर सिर्फ दौलत ही नहीं लूटता था बल्कि जंग के बाद अलग अलग इलाकों से बंधक बनाई गई लड़कियों को खिलजी के हरम में शामिल करने के लिए दिल्ली भेज देता था।

अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु के कुछ ही दिनों बाद उसके दूसरे पुत्र मुबारक शाह जो देवल देवी पर बुरी नजर रखने लगा था। जिसके लिए उसने अपने बड़े भाई खिज्र खां की आंखें निकलवा कर मार डाला तथा देवल देवी से जबरदस्ती अपना निकाह कर लिया। देवल देवी को न पहले खिज्र खां से कोई लगाव था और न अब मुबारक शाह से।

इस अफरातफरी के माहौल में दिल्ली सल्तनत में एक व्यक्ति- खुशरो शाह अत्यन्त प्रभावशाली बन गया था। खुशरो शाह एक सुन्दर, दृढ़ निश्चयी और बलिष्ठ और वीर युवक था। वह मूलत: एक गुजराती हिन्दू था जिसे पकड़कर दिल्ली लाया गया तथा जबरदस्ती मुसलमान बनाया गया था। उसने विलासी मुबारक शाह का पूर्ण विश्वास प्राप्त किया। उसने एक बार मुबारक शाह को पुन: दक्षिण पर आक्रमण के लिए प्रोत्साहित किया तथा स्वयं भी उसके साथ गया। अगली बार वह मुबारक शाह की आज्ञा से स्वतंत्र रूप से गया।

खुशरो शाह के कई कर्तव्य मशहूर थे जैसे तलवार बाजी, आग पर चलना, 20 अप्रैल, 1320 ई. की रात्रि को लगभग 300 हिन्दुओं के साथ खुशरो शाह ने शाही हरम में यह कहकर प्रवेश किया कि इन्हें मुसलमान बनाना है तथा इसके लिए परम्परा के अनुसार सुल्तान के सम्मुख पेश किया जाना है।

इस पेशी के समय खुशरो के मामा खडोल तथा भरिया नामक व्यक्ति ने इसका लाभ उठाकर मुबारक शाह की हत्या कर दी। फिर शाही परिवार के भी व्यक्तियों को मार दिया गया। खुशरो शाह ने अपने को सुल्तान घोषित कर दिया और जानबूझकर अपना नाम नहीं बदला। इसके साथ ही उसने देवल देवी से विवाह कर लिया।


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