शर्म करें सरकारें! तड़पती प्रसूता के घरवाले गिड़गिड़ाते रहे, पर डॉक्टरों ने भर्ती नहीं किया, सड़क पर ही बच्चे का जन्म

शर्म करें सरकारें! तड़पती प्रसूता के घरवाले गिड़गिड़ाते रहे, पर डॉक्टरों ने भर्ती नहीं किया, सड़क पर ही बच्चे का जन्म

बीच सड़क बच्चे को जन्म

The Netizen News

देश में नेताओ की जुबान कुछ और कहती है पर हकीकत कुछ और है क्या भाजपा क्या कांग्रेस। बीते दिन कन्नौज की घटना के बाद कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश सरकार को निशाने पर लिया वंही राजस्थान कि शर्मसार कर देने वाली घटना भी आज सामने है।

उत्तर प्रदेश कन्नौज में बेटे को इलाज न मिलने के कारण उसकी मौत हो गई लाश से लिपटकर रोते पिता का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। जिसके बाद प्रदेश सरकार को कांग्रेस हमलावर हुयी।

वंही अब मामला राजस्थान के बांसवाड़ा का है जंहा एक प्रसूता को डॉक्टरों ने एडमिट करने से मना कर दिया जिसके बाद सड़क पर ही उसने बच्चे को जन्म दिया। प्रसूता के पति मान सिंह का कहना है, ‘‘साहब मेरी पत्नी को बच्चा होने वाला है। वह बहुत तकलीफ में है। इसे भर्ती कर लीजिए।’’ यह गुहार थी कांतु के पति मानसिंह की, लेकिन इससे गांव के प्राथमिक स्वास्थ केंद्र में मौजूद स्टाफ का दिल नहीं पसीजा।

उन्होंने जांच किए बिना ही प्रसूता को जिला अस्पताल ले जाने के लिए कहा। उसे नजदीक के एक और सरकारी अस्पताल में भी भर्ती नहीं किया गया। आखिरकार महिला ने डेढ़ घंटे तड़पने के बाद अस्पताल के सामने सड़क पर ही बच्चे को जन्म दिया। मामला राजस्थान में बांसवाड़ा जिले का है।

एंबुलेंस भी उपलब्ध नहीं कराई गई

सोमवार रात करणघाटी गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से रेफर किया गया तो उसे एंबुलेंस भी उपलब्ध नहीं कराई गई। आखिरकार परिवार उसे प्राइवेट वाहन से ही लेकर बांसवाड़ा निकला। रास्ते में उसका दर्द बढ़ गया, तब वे उसे मोहकमपुरा अस्पताल ले गए। यहां भी डॉक्टरों ने उसे भर्ती करने से मना कर दिया और फौरन बांसवाड़ा जाने के लिए कहा।

डेढ़ घंटे अस्पताल के सामने ही तड़पती रही प्रसूता

कांतु का दर्द इतना बढ़ गया था कि आगे का सफर करना भी मुश्किल लग रहा था। पति और सास ने इस उम्मीद में अस्पताल के सामने ही रुकने का इंतजार किया कि कोई खतरा हुआ तो शायद उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया जाएगा। महिला डेढ़ घंटे तक दर्द से चीखती रही, लेकिन डॉक्टरों और वहां मौजूद नर्सिंग स्टाफ का दिल नहीं पसीजा।

सलून वाले ने चादर दी, जिसकी आड़ में डिलीवरी कराई गई

तमाम मिन्नतों का अस्पताल स्टाफ पर कोई असर नहीं हुआ तो सास ने ही डिलीवरी कराने का फैसला किया। एक सलून वाले ने मानसिंह को चादर दे दी, जिसकी आड़ में डिलीवरी कराई गई।

प्रसव के आधे घंटे बाद स्वास्थ्य केंद्र के मेल नर्स खानचंद ने सड़क पर ही बच्चे की नाल काटी और कुलगढ़ जाने की सलाह देकर चले गए। परिवार ने अपने गांव लौटने का फैसला किया। वे रास्ते में थे, तभी उन्हें कुछ पुलिसवाले मिले। उन्होंने प्रसूता की हालत देखकर उसे कुशलगढ़ के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया।

सीएमएचओ ने कहा- कार्रवाई के निर्देश दिए हैं चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. एचएल ताबियार का कहना है कि मोहकमपुरा में एक ही नर्सिंग कर्मी था, इसलिए प्रसूता को कुशलगढ़ जाने के लिए कहा गया था।

हालांकि, वहां डॉक्टर नहीं होने और प्रसूता को भर्ती नहीं किए जाने पर कुशलगढ़ के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर को कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है


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