बाजार में बढ़ता सिंथेटिक दूध का कारोबार, किसान परेशान प्रदेश में पशुपालन से मुँह फेरते लोग। – News

बाजार में बढ़ता सिंथेटिक दूध का कारोबार, किसान परेशान प्रदेश में पशुपालन से मुँह फेरते लोग।

The Netizen News

देश में डेयरी उद्योग करीब 6 लाख करोड़ रुपए का है और महज एक लाख करोड़ ही संगठित क्षेत्र में है, बाकी असंगठित है। एडेलवाइस सिक्युरिटीज की आई ताजा रिपोर्ट के अनुसार, डेयरी क्षेत्र का कारोबार सालाना 15 प्रतिशत की दर से बढ़ता हुआ 2020 तक 9,400 अरब रुपये तक पहुंच जाने की उम्मीद है।

मगर इसकी जमीनी हकीकत यह भी है कि भले ही देश का डेयरी उद्योग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन उसकी तुलना में किसानों की आमदनी बढ़ने की बजाए लगातार घट रही है।

“राजस्थान, हरियाणा समेत कई राज्यों में दूध के दाम 30 से 20 प्रतिशत तक गिरे हैं, लेकिन जो उपभोक्ता दूध खरीद रहा है उसके दामों में गिरावट नहीं है तो इसका मुनाफा ये निजी डेयरी कंपनियां उठा रही हैं।किसान की लागत जितनी लगती है, उतना किसान नहीं निकाल पा रहा है।” ऐसा कहना है डेयरी संचालक एम. एस. तरार का।

सबसे पहले समाचार पाने के लिए लाइक करें

कई किसानो का कहना है कि “अगर सरकार दूध का रेट नहीं दे सकती हैं तो चारा बनाने वाली मशीन पर सब्सिडी ही दें। उदाहरण के लिए हरे चारे में हम लोग मक्का देते हैं तो अगर उसको प्रोसेस करके साइलेज बना लें तो उसकी न्यूट्रीशियन वैल्यू बढ़ जाती है, जिससे उत्पादकता भी बढ़ेगी और गुणवत्ता भी अच्छी होगी।किसानों को घाटा भी कम होगा।”

भूमिहीन एवं सीमांत किसान के लिए डेयरी व्यवसाय उनके जीवनयापन का एक जरिया बन गया है। करीब 7 करोड़ ऐसे ग्रामीण किसान परिवार डेयरी से जुड़े हुए हैं। साथ ही 176.35 मिलियन टन उत्पादन के साथ भारत दुनिया में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक देश है।

दुधारू पशुओं की संख्या भी सबसे ज्यादा भारत में है, लेकिन पिछले पांच सालों में दूध के दाम सही न मिलने से किसानों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशासन से मिल बाजार में नकली दूध कारोबारी कर रहे है जहर का धंधा

शैंपू और केमिकल से तैयार सिंथेटिक दूध किसानो को नहीं मिल रहे सही दाम

मध्य प्रदेश में जब नकली दूध के कारोबारी के नाम सामने आये तो पता चला की दूध के नाम पर जहर का व्यवसाय हो रहा है। पिछले दिनों मिलावटी दूध बेचने के आरोप में वीरेन्द्र गुर्जर और उसके लैब टेक्निशीयन अजय माहौर को एसटीएफ ने पकड़ा था।

पूछताछ के दौरान दोनों ने खुलासा किया था कि किसानों से हर दिन करीब 15 हजार लीटर दूध खरीदते हैं, उसमें शैंपू और दूसरे कैमिकल मिलाकर करीब 25 हजार लीटर दूध तैयार कर खपाते हैं। इस खुलासे पर एसटीएफ ने वनखण्डेश्वर डेयरी का बैंक एकाउंट ट्रेस किया। अभी वीरेन्द्र और अजय माहौर के निजी खातों की पड़ताल बाकी है।

तो नतीजा चौकाने वाले सामने आये है मास्टरमाइंड वीरेन्द्र ने बताया था कि इस धंधे को शुरू करने के बाद उसके पास पैसों की कमी नहीं है।

मिलावटखोरी से जो पैसा कमाकर दूध सप्लाई के लिए टैंकर भी खरीदे हैं। उनसे ही कई कंपनियों में दूध भेजता है। इतना ही नहीं उसने जहरीले दूध की काली कमाई से तीन बंगले, कई एसयूवी, टैंकर, दो मिल्क प्रोसेसिंह यूनिट और सैकड़ों बीघा खेती की जमीन खरीदी है।

एसटीएफ का कहना है कि वीरेन्द्र और अजय से काले कारोबार के बारे में जो जानकारियां मिली हैं उनकी जांच की जा रही है।

जब सिंथेटिक दूध मात्र 6 से 8 रुपए प्रति लीटर में तैयार हो तो किसान को कैसे मिले उचित दाम ?

एसटीएफ और खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अफसराें ने बताया कि 40 रु. लीटर की दर से सिंथेटिक दूध की सप्लाई की जाती थी,

जबकि इसकी एक लीटर बनाने की लागत 6 से 8 रुपए के बीच हाेती थी। सिंथेटिक दूध बेचने से डेयरी काराेबारी को एक लीटर दूध पर 32 से 34 रुपए और राेजाना करीब 5 लाख रुपए का अतिरिक्त मुनाफा हाेता था।

अनुमान के मुताबिक सिंथेटिक दूध काराेबारी हर महीने राज्य के विभिन्न शहराें में जहरीला दूध बेचकर 1 कराेड़ 80 लाख रुपए का काराेबार करते थे।   


The Netizen News

अपने क्षेत्रीय और जनपदीय स्तर की सभी घटनाओ से जुड़े अपडेट पाने के लिए - सोशल मीडिया पर हमे लाइक, सब्सक्राइब और फॉलो करें -

फेसबुक के लिए यहाँ क्लिक करें

ट्विटर के लिए यहाँ क्लिक करें

यूट्यूब चैनल के लिए

Subscribe To Our Newsletter

[mc4wp_form id="319"]