कैंपों में बंद उइगर मुसलमानों पर चीनी बर्बरता, जीते-जी निकाले जा रहे किडनी और फेफड़े।

कैंपों में बंद उइगर मुसलमानों पर चीनी बर्बरता, जीते-जी निकाले जा रहे किडनी और फेफड़े।

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वैसे चीन में इस समुदाय के अवैध ऑर्गन रिमूवल की बात पहले भी उठती रही है। पिछले साल जिनेवा में UN Human Rights Council की मीटिंग के दौरान ये बात उठी।

इस दौरान चीन में काम कर रही एक स्वयंसेवी संस्था चाइना ट्रिब्यूनल ने आरोप लगाया कि चीन उइगर मुस्लिमों के दमन के लिए ये नया तरीका अपना रहा है।

ट्रिब्यूनल के मुताबिक चीन ने डेढ़ लाख से ज्यादा मुस्लिमों को बंदी बना रखा है और जरूरत पड़ने पर उनके हार्ट, किडनी, लंग्स और यहां तक कि स्किन तक निकाल लेता है ताकि किसी चीनी की जान बचाई जा सके। इसके अलावा एक और धार्मिक समुदाय Falun Gong के भी सदस्यों के अंग जबर्दस्ती निकाले जा रहे हैं।

यूएन की मीटिंग में चाइना ट्रिब्यूनल के प्रतिनिधि हामिद सबी ने बताया कि चीन में ये फोर्स्ड ऑर्गन हार्वेस्टिंग कई सालों से चल रही है. बयान के साथ कई सबूत भी रखे गए। इसमें बताया गया है कि कैसे चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने उइगर मुस्लिमों को बंदी बना रखा है और उन्हें मौत की सजा सुनाने के बाद सबसे पहले उनके ऑर्गन निकाल लिए जाते हैं।

यहां तक कि दूसरे माइनोरिटी समुदाय Falun Gong के सदस्यों के लिए सरकार का आदेश है कि उन्हें जिंदा रखते हुए ही उनके शरीर से सारे ऑर्गन निकाल लिए जाएं और उनकी ऊंचे दामों पर बिक्री की जाए बिजनेस इनसाइडर में आई रिपोर्ट के मुताबिक यही वजह है कि चीन के अस्पतालों में ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए काफी कम इंतजार करना होता है, जबकि आमतौर पर ये टाइम सभी देशों में काफी ज्यादा है।

चीन ने किया था रिफॉर्म का दावा

पहले भी चीन पर डिटेंशन कैंपों में रह रहे कैदियों के ऑर्गन जबर्दस्ती निकालने के आरोप लगते रहे हैं। लेकिन साल 2015 में चीन में बताया कि उनके यहां अब ये प्रैक्टिस बंद हो चुकी है।

अपने पक्ष में तर्क देते हुए चीन ने कहा कि उनके यहां वालंटरी ऑर्गन डोनेशन पर काफी जोर है इसलिए ऑर्गन की कमी नहीं होती है. हालांकि साइंस जर्नल BMC Medical Ethics के मुताबिक ऐसा बिल्कुल नहीं है और चीन में वही प्रैक्टिस 2010 से चली आ रही है।

कोरोना मरीजों के लिए की जा रही जबर्दस्ती

अब कोरोना वायरस के दौर में चीन की हरकतें एक बार फिर से मानवाधिकार संगठनों के निशाने पर हैं. जैसे कोरोना वायरस से गंभीर रूप से प्रभावित मरीजों के ऑर्गन फेल हो रहे हैं. ऐसे में उन्हें नए ऑर्गन देने के लिए इन्हीं उइगर मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है. माना जा रहा है कि डिटेंशन कैंप में रह रहे इन कैदियों के लिए चीनी सरकार का kill-on-demand आदेश आ चुका है


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