कभी गौ हत्या, कभी बच्चा चोर, कभी कोरोना लगातार बढ़ती भीड़ हत्या पर क्यों न बनता कानून ?

कभी गौ हत्या, कभी बच्चा चोर, कभी कोरोना लगातार बढ़ती भीड़ हत्या पर क्यों न बनता कानून ?

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देश में भीड़ हत्या अब एक सामाजिक कोढ़ बनती जा रही है। कभी गौ हत्या के नाम पर जब मुस्लिम इस भीड़ हिंसा का शिकार हो रहे थे। तब टीवी चैनल पर बैठे राजनैतिक प्रतिनिधि से लेकर सामाजिक बौद्धिक व्यकित ने इसे पर खूब सियासी रोटियां सेंकी।

पहलू खान और तबरेज़ अंसारी जैसी घटनाये पूरे देश को हिलाकर रख दिया। कई घटनाएं धर्म आधारित थी तो कई घटनाएं जाति आधारित भीड़ हिंसा हुयी लेकिन हर मामले में कार्यवाही से अधिक राजनीती हुयी।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार में ऐसे कई मामले सामने थे जिनके वीडियो वायरल हुए लेकिन कोई संतोष जनक कार्यवाही नहीं हुयी जबकि हिंसा का वीडियो सोशल मीडिया पर चीक -चीक कर चिल्लारहा था की गुनाह गार कौन है।

कोरोना वायरस आज पूरे देश में घातक रूप से फैलता जा रहा है वहीं वायरस के चलते पूरे देश में लोकडाउन का माहौल है जबकि इस बंदी के दौर में ऐसी कई हिंसक घटनाएं सामने आई हैं जिसमें किसी को कोरोना ग्रसित कह कर मार दिया गया तो किसी को कोरोना के नाम पर अफवाह फैलाई गई।

इंदौर और गुरुग्राम की घटनाएं ऐसे ही उदहारण है।

ताजा मामला महाराष्ट्र है जहां साधुओं को बच्चा चोर कह कर पीटा गया जिसके बाद उनकी मौत हो गई। ऐसा नहीं है भीड़ हिंसा पहली बार हुई, भारत में लगातार बढ़ती भीड़ हिंसा पर राजनैतिक चर्चे तो बहुत हुई लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

कई मामले ऐसे भी सामने आए हैं जिसमें भीड़ हिंसा की घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए इन वीडियो में हिंसा करने वालों का चेहरा साफ नजर आता है फिर भी कानून किस बात का इंतजार करता है कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई ? लिहाजा भीड़ हिंसा करने वालों के हौसले बुलंद हैं और लगातार हिंसा को भीड़ हिंसा में बदल कर वे अपने मकसद को पूरा कर रहे हैं।


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