अमेरिका में 'श्वेत-श्रेष्ठता' के खिलाफ विद्रोह भारत में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा फोन पर SC /ST को गली देना SC/ST act के तहत अपराध नहीं

अमेरिका में ‘श्वेत-श्रेष्ठता’ के खिलाफ विद्रोह भारत में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा फोन पर SC /ST को गली देना SC/ST act के तहत अपराध नहीं

The Netizen News

अमरीका में सोमवार को लगातार छठी रात एक गोरे पुलिस अधिकारी के हाथों हुई काले नागरिक जॉर्ज फ़्लायड की मौत को लेकर हिंसक विरोध प्रदर्शन जारी हैं.

इसी बीच भारत की एक अदालत (पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट) ने ‘ऊंच’ कही जाने वाली जातियों को यह छूट दे दी है कि अगर वे किसी दलित को फोन पर या अकेले में जातिसूचक गालियां देते हैं तो यह एससी-एसटी एक्ट के तहत कोई अपराध नहीं है। अदालत के कहने का मतलब है कि बस बहुत सारे लोगों के बीच किसी दलित को जातिसूचक गाली मत दो, जाति के आधार पर बेइज्जत नहीं करो। अकेले में या फोन पर चलेगा।

उदाहरण : फोन पर SC/ST को गाली देना अपराध, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हो सकती है पांच साल जेल

न्यायमूर्ति द्वय जी चेलामेश्वर और एस अब्दुल नजीर की पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 17 अगस्त के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के रहने वाले व्यक्ति की याचिका खारिज कर दी थी जिसने अपने खिलाफ एक महिला द्वारा दर्ज करायी गई प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की थी। पीठ ने यह कहते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी कि उसे मामले की सुनवाई की दौरान यह साबित करना होगा कि उसने महिला से सार्वजनिक स्थल से बात नहीं की थी।

गैरतलब है कि अमेरिका में गोरे डेरेक शॉविन के कुकर्म पर अमेरिका और दुनिया भर में बहुत सारे गोरे शर्मिंदा हैं, ब्लैंक्स से माफी मांग रहे रहे हैं, उनके अगुवाई में विद्रोह में शामिल हैं, गोरों के चुप रहने को हिंसा बता रहे हैं।

लेकिन हमारे भारत में..???

‘ऊंच’ कही जाने वाली जातियां अदालत से यह छूट हासिल कर रही हैं कि फोन पर अकेले में दलितों को जातिसूचक गालियां दी जा सकती हैं, उन्हें बेइज्जत किया जा सकता है!


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