कोरोना काल में 200 रुपए किलो तक पहुंची दाल की कीमत, गरीब कैसे भरेगा पेट ?

कोरोना काल में 200 रुपए किलो तक पहुंची दाल की कीमत, गरीब कैसे भरेगा पेट ?

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कोरोना के संकट के बीच देश में खाद्य पदार्थों की बढ़ी महंगाई को लेकर रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी चिंता जताई है। रेपो रेट में कटौती और लोन की किस्तों में तीन महीने की राहत की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति की दर चिंताजनक है।

उन्होंने कहा कि दालों की बढ़ती कीमत चिंता बढ़ाने वाली है और बाजार को तत्काल खोले जाने से कीमतों में राहत मिल सकती है। मुद्रास्फीति के आंकड़ों को पेश करते हुए शक्तिकांत दास ने कहा कि अप्रैल महीने में महंगाई की दर 8.6 फीसदी रही है। उन्होंने कहा कि 2020 के पहले हाफ में महंगाई दर ऊंची बनी रह सकती है, लेकिन अगले हाफ में कुछ राहत मिल सकती है।

200 रुपये से ऊपर चल रहे दाम: रिटेल मार्केट में दाल की कीमतें 200 रुपये प्रति किलो या फिर उससे भी अधिक चल रही हैं। बिग बास्केट पर फिलहाल उड़द की दाल 265 रुपये प्रति किलो मिल रही है।

यही नहीं बिग बास्केट पर दाल की उपलब्धता भी नहीं है। इसके अलावा अमेजॉन की बात करें तो अरहर दाल 150 रुपये से लेकर 300 रुपये तक के रेट में मिल रही है। हालांकि ग्रोफर्स पर अरहर दाल 142 रुपये प्रति किलो के भाव में मिल रही है।

उत्पादन में कमी से भी बढ़ा संकट: दाल की कीमतें भले ही लॉकडाउन के दौरान अप्रत्याशित तौर पर बढ़ी हैं, लेकिन इसकी एक वजह 2019-20 में उत्पादन में कमी होना भी है। केंद्र सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2019-20 के लिए 26.30 मिलियन टन के उत्पादन का लक्ष्य तय किया था।

हालांकि दलहन के उत्पादन के रकबे में कमी और बेमौसम बरसात के चलते उत्पादन में करीब 10 फीसदी की कमी का अनुमान है।

इंडिया पल्सेस ऐंड ग्रेन एसोसिएशन के मुताबिक भारत में 25 मिलियन टन दाल की खपत है, ऐसे में इस साल अपनी ही जरूरतों के लिए इंपोर्ट की जरूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 3 मिलियन टन दाल के आयात का फैसला लिया है।


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