दुधमुंहे बच्चे को मां की गोद से लेकर भागा बंदर, कड़ी मशक्‍कत के बाद मिला जख्‍मी बच्‍चा – मऊ

दुधमुंहे बच्चे को मां की गोद से लेकर भागा बंदर, कड़ी मशक्‍कत के बाद मिला जख्‍मी बच्‍चा

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इंसानों ने जंगलों को काट जानवरों के रिहाइश की जगह छीन ली, ऐसे में बंदर सरीखे जानवर आबादी वाले इलाके में आकर आएदिन इंसान के लिए परेशानी का सबब बन जाते हैं ।

मऊ के घोसी बाजार में हालिया घटित मामले ने सभी को परेशान कर रख दिया है। बताया जा रहा है कि एक बंदर एक महीने के बच्चे को उसकी मां की गोद से छीन ले गया।

बच्चे को चंगुल से मुक्त कराने के लिए लोगों ने बंदर को घेर लिया, तब कहीं जाकर वह बच्चे को छोड़ कर भागा। इस घटना में बच्चा घायल हो गया जिसे एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

घोसी में बंदरों के आतंक का यह पहला मामला नहीं है। स्थानीय लोगों की मानें तो बंदरों ने अब तक यहां एक दर्जन से ज्यादा लोगों को जख्‍मी किया है। घोसी बाजार इलाके में शनिवार को पुष्पा नाम की महिला अपने बच्चे के साथ घर के मुख्य द्वार पर बैठी थी।

तभी एक बंदर झटके से उनके बच्चे को गोद से लेकर भाग गया। चीखपुकार मचने पर मोहल्‍लेवालों ने बंदर की घेराबंदी की तो वह बच्चे को वहीं जमीन पर छोड़ कर भाग गया। बंदर ने बच्चे को काट भी लिया था जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया था।

बंदरो के हिंसक स्वभाव पर पीजी कॉलेज में कार्यरत पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ अचल कुमार सिंह से एनबीटी ऑनलाइन ने संपर्क किया। डॉ सिंह ने बताया कि पिछले कुछ दशकों में बंदरों ने रिहाइशी इलाको में बहुत माइग्रेट किया है।

नेचुरल हैबिटैट नहीं होने के कारण उनको भोजन आदि की समस्या होती है। सामान्य बर्ताव में तब्दीली के कारण वह ज्यादा हिंसक हो जाते है। वैसे लगातार जंगलों के काटने का ही प्रतिफल है कि कभी बंदर तो कभी तेंदुआ इंसानों के रिहाइशी इलाके में आकर उन्हें नुकसान पहुंचा रहे हैं।


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