काशीपुर : प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट पर जीरो टालरेन्स की सरकार के भ्रष्टाचार का धब्बा लगा। – उत्तराखंड

काशीपुर : प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट पर जीरो टालरेन्स की सरकार के भ्रष्टाचार का धब्बा लगा।

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काशीपुर : प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट पर जीरो टालरेन्स की सरकार के भ्रष्टाचार का धब्बा लगा।

करोडों की लागत से बनने वाले काशीपुर के हिमालयन फूड पार्क में बिना मानको को पुरा किये ही विभागिय एनओसी दे दी गयी और नियमों को ताक पर रख कर उघोग भी शुरु कर दिये गये

जबकि फूड पार्क को लेकर सरकार के नियमों की तो यहां धज्जियां उडाई ही गयी वहीं बिना कार्य पुरा हुए आखिर कैसे  विभागों ने फूड पार्क को हरी झंडी दिखा दी इसको लेकर एक शिकायत के आधार पर एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जवाब तलब किया है।  

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प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजक्टों में से एक है फूड पार्कों को विकसित करना, और दूर दराज पर्वतीय क्षेत्रों के उत्पादों को बाजार देना, जिसके लिए औघोगिक नगरी काशीपुर में करोडों की लागत से फूड पार्क विकसित किया गया था, जहां फूड पार्क को विकसित करने के साथ ही छोटे छोटे उघोग भी स्थापित किये जाने थे, जिसके लिए काशीपुर में कई सो एकड  में हिमालयन फूड पार्क का निर्माण किया गया, सरकारी तौर पर जिन मानको को पुरा किया जाना था वो अभी पुरे भी नहीं हुए थे कि विभागों ने तीन साल पहले ही एनओसी जारी कर दी। जबकि फूड पार्क के मानकों में सबसे महत्वपूर्ण ये था कि पार्क के चारों ओर ग्रीन बेल्ड का निर्माण होना चाहिए था और ईटीपी प्लांट भी विकसित किया जाना चाहिए था, किन्तु पार्क में ना तो कोई ग्रन बेल्ट ही स्थापित की गयी और ना ही इटीपी प्लांट ही बनाया गया, यही नहीं पर्वतीय जिन उत्पादों को बाजार देने की मंशा थी उसके लिए भी कोई ठोस पहल तक नहीं की गयी, लेकिन जिन  विभागों ने अनापत्ति जारी की है उनके अनुसार सब कुछ ओके है लेकिन धरातल पर अभी कोई भी मानक पुरे नहीं हुए है, इसको लेकर काशीपुर के समाज सेवी द्वारा सूचना मांगी गयी, मांगी गयी सूचना के आधार पर समाज सेवी ने एनजीटी की कोर्ट में इस सन्दर्भ में वाद भी दायर कर लिया है।

वहीं एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और डीएम से तीन माह में इन शिकायतों पर जवाब तलब किया है। जिसमें उन्होने ग्रीन बेल्ड बनाये बिना आखिर कैसे एनओसी जारी की गयी और ईटीपी प्लांट सहित कई बिन्दुओं पर जांच की आख्या मांगी है, वहीं प्रदूषण नियंत्रम बोर्ड के अधिकारियों की माने तो एनजीटी के आदेश उन्हे मिल गये है जिसमें तीन माह में रिपोर्ट सोंपनी है जिसके लिए विभाग अपनी कार्यवाही जल्द शुरु करने वाला है।

बहरहाल जीरो टालरेंस का दावा करने वाली प्रदेश की भाजपा सरकार में अधिकारी कितने बे लगाम है ये किसी से छुपा नहीं है, वहीं अब करोडों की लागत से बनने वाले फूड पार्क निर्माण में मानको की अंदेखी कर आखिर कैसे अनापत्ति दे दी गयी और किसके इशारे पर अधिकारियों की चाबी धुमी है ये तो जांच के बाद पता चल पायेगा, लेकिन जीरो टालरेंस की सरकार के दावों की जरुर पोल खुलती नजर आ रही है।


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