गलवान घाटी तनाव चीन की कंपनी ने भारत में किया 100 करोड़ डॉलर का निवेश

गलवान घाटी तनाव चीन की कंपनी ने भारत में किया 100 करोड़ डॉलर का निवेश

At the Auto Expo held in February this year, GWM had announced that it also planned to invest in battery research and development and manufacturing in India to reinforce and accelerate “India’s Electrification Strategy”.

The Netizen News

मंगलवार 16 जून की सुबह से ही भारत-चीन सीमा पर तनाव बढ़ना शुरू हो गया था। दोपहर तक एक ख़बर आई, ‘भारत-चीन सीमा पर विवाद, तीन भारतीय सैनिक मारे गए.’

जिसके बाद से पूरे देश में चीन के खिलाफ लोगो का गुस्सा एकदम से फुट पड़ा, लोग चीनी सामान का बहिष्कार कर रहे है और चीन के कंपनियों से कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने की मांग कर रहे है।

वंही एक खबर चौकाने वाली सामने आयी है। इसमें एक ऐलान किया गया था, “एक चाइनीज़ मोटर कंपनी जीडब्ल्यूएम और महाराष्ट्र सरकार के बीच एक सहमति पत्र पर दस्तख़त हुए। इसमें चरणबद्ध तरीक़े से 100 करोड़ डॉलर का निवेश होगा और इसके ज़रिए 3,000 नौकरियां पैदा की जाएंगी.”

दरअसल, यह समझौता सोमवार 15 जून को हुआ था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मैग्नेटिक महाराष्ट्र कैंपेन के ज़रिए राज्य में 16,000 करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान किया था। इसमें एक निवेश जीडब्ल्यूएम का भी था।

सोमवार को जब मैग्नेटिक महाराष्ट्र कैंपेन के तहत अन्य समझौतों के साथ ही इस समझौते पर भी दस्तख़त हुए तो मुख्यमंत्री ने ट्विटर पर लिखा, “मानवता के लिए एक नई शुरुआत.”

उन्होंने कहा, “हम हर संभव तरीक़े से मदद करेंगे ताकि आपका काम दोबारा शुरू हो सके.”

महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री सुभाष देसाई ने कहा, “दूसरे देशों के मुक़ाबले महाराष्ट्र में ज़्यादा निवेश और रोज़गार उपलब्ध होंगे। इन इंडस्ट्रीज़ के लिए 40,000 हेक्टेयर ज़मीन राज्य में रिज़र्व की गई है। कई तरह के लाइसेंस हासिल करने में लगने वाले वक़्त की बजाय अब केवल एक ही लाइसेंस लेना होगा और वह 48 घंटे में मिल जाएगा. साथ ही हम इंडस्ट्रियल वर्कर्स ब्यूरो भी स्थापित कर रहे हैं.”

चीन के ख़िलाफ़ देशव्यापी ग़ुस्सा

कोरोना वायरस के फैलने के बाद पूरी दुनिया में चीन के ख़िलाफ़ ग़ुस्सा देखा गया है। बॉयकॉट चाइनीज़ प्रोडक्ट्स, बैन टिकटॉक जैसे हैशटैग्स इस दौरान भारत में ट्विटर पर ट्रेंड करते रहे हैं।

इन सबके बीच में सीमा पर तनाव बढ़ा और एक ख़ूनी घटना घट गई। ऐसे में चीन के ख़िलाफ़ ग़ुस्सा और ज़्यादा बढ़ गया और सारा दिन सोशल मीडिया पर चीन के ख़िलाफ़ पोस्ट्स की भरमार बनी रही।

दूसरी ओर, जीडब्ल्यूएम के ऐलान और एक और चीनी कंपनी के ठेका हासिल करने की ख़बर भी आई कुछ दिन पहले यह ख़बर आई थी कि एक बड़ी चीनी कंपनी को दिल्ली में एक अंडरग्राउंड रूट बनाने का ठेका मिला है।

शांघाई टनल इंजीनियरिंग कंपनी (एसटीईसी) ने दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस प्रोजेक्ट के लिए सबसे नीची बोली लगाई थी. कंपनी को 1,126 करोड़ रुपये में यह टेंडर मिल गया है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आनुषांगिक संगठन स्वदेशी जागरण मंच का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत की बात चंद दिनों पहले ही की है। ऐसे में जब टाटा और एलएंडटी जैसी भारतीय कंपनियां टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा ले रही हैं तो किसी चीनी कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट नहीं दिया जाना चाहिए।


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