पुलवामा में शहादत के सालभर बाद भी परिजनों को नहीं मिली पेंशन, न नौकरी; अनशन करने को मजबूर परिवार

पुलवामा में शहादत के सालभर बाद भी परिजनों को नहीं मिली पेंशन, न नौकरी; अनशन करने को मजबूर परिवार

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पुलवामा आतंकी हमले को हुए आज एक साल हो चुका है। हमले में शहीद हुए जवानों की शहादत को यह देश कभी नहीं भूलेगा। जवानों की शहाद के बाद उनके परिजनों के लिए बड़ी-बड़ी घोषणाएं हुई थीं और तमाम वादे किए गए थे।

लेकिन प्रयागराज के शहीद महेश यादव के परिजनों को अभी तक उन वादों के पूरा होने का इंतजार है। स्थिति ये है कि शहीद के परिजन ने अगले माह लखनऊ में अनशन शुरू करने की बात कह रहे हैं।

पुलवामा हमले में शहीद हुए 40 जवानों में प्रयागराज के मेजा इलाके के महेश यादव भी शामिल थे। सीआरपीएफ की 118वीं बटालियन में कांस्टेबल महेश यादव अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे और पूरे घर की जिम्मेदारी उन पर थी।

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महेश यादव के पुलवामा हमले में शहादत की खबर सुनते ही उनके घर कोहराम मच गया था। इस दौरान पूरा गांव और आसपास के इलाके के लोग भी उनके घर पहुंचे थे।

शहीद महेश यादव के पिता ने बेटे की अर्थी को कंधा देते वक्त गर्व से ऐलान किया था कि एक बेटे को खोने के बावजूद वह छोटे बेटे और अपने पोतों को भी देश सेवा के लिए फौज में भेजेंगे।

पुलवामा हमले के कुछ दिन बाद तक उनके घर मंत्रियों और दूसरे नेताओं का खूब आना जाना हुआ था।

आज तक पुरे नहीं हुए एक भी वादे

इस दौरान नेताओं द्वारा शहीद के परिजनों के लिए कई वादे किए गए थे, जिनमें परिवार के एक सदस्य को नौकरी दिलाने, हाईवे से घर तक पक्की सड़क, घर के पास हैंडपंप लगवाने, बच्चों की मुफ्त पढ़ाई, पत्नी को पेंशन देने, डेढ़ एकड़ जमीन देने, शहीद जवान की मूर्ति लगवाने और किसी स्कूल कॉलेज का नाम शहीद के नाम पर किए जाने के वादे किए गए थे।


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