यदि मां-बाप का नाम NRC में हैं तो उनके बच्चों को नहीं भेजा जाएगा डिटेंशन सेंटर - सुप्रीम कोर्ट – नेटीजन विशेष

यदि मां-बाप का नाम NRC में हैं तो उनके बच्चों को नहीं भेजा जाएगा डिटेंशन सेंटर – सुप्रीम कोर्ट

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असम में एनआरसी की सूची से बाहर किए गए बच्चों को कथित तौर पर हिरासत में लेने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। यह वो बच्चे हैं जिनके माता-पिता के नाम तो एनआरसी की सूची में हैं, लेकिन उनके नाम नहीं हैं। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर सुनवाई करेगा।

भारत के चीफ जस्टिस शरद ए. बोबड़े की अगुवाई वाली बेंच के समक्ष अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल को एनजीओ सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस द्वारा दायर एक याचिका को अदालत के समक्ष रखा।

बता दें कि असम एनआरसी की लिस्ट में 19 लाख से ज्यादा लोग शामिल नहीं हो सके हैं। 3 करोड़ 11 लाख 21 हजार लोगों को एनआरसी की फाइनल लिस्ट में जगह मिली थी और 19,06,657 लोग इससे बाहर हो गए थे।

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केंद्र की तरफ से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल में शीर्ष अदालत को यह जानकारी सोमवार को दी। वेणुगोपाल ने कहा, मैं इस बात की परिकल्पना नहीं कर सकता कि बच्चों को डिटेंशन सेंटर भेजा जाएगा और उनको परिवार से अलग किया जाएगा। जिन अभिभावकों की नागरिकता मिल चुकी है उनके बच्चों को डिटेंशन सेंटर नहीं भेजा जाएगा।

वेणुगोपाल ने यह बात चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस सूर्यकांत और बीआर गवई की संयुक्त पीठ के सामने एक याचिक पर सुनवाई के दौरान कही। इस याचिका में उन बच्चों की सुरक्षा की मांग की गई थी जिनका नाम एनआरसी में शामिल नहीं हो सका था।

एक वरिष्ठ वकील अपर्णा भट्ट ने NGO द्वारा दाखिल की गई याचिका का संज्ञान लेते हुए अदालत के सामने उन 60 बच्चो की बात रखा जिनका नाम एनआरसी से बाहर रखा गया है। “उनके सभी दस्तावेज दिखाए गए थे। इसके बावजूद, अंतिम एनआरसी सूची में उनके नाम नहीं आया जबकि उन्ही दस्तावेजों से उनके माता-पिता के नाम सूची में हैं।

आवेदन में कहा गया है कि “अनुचित तरीके से बच्चों को एनआरसी फाइनल सूची से बाहर रखा गया है, तब भी जब उनके माता-पिता को शामिल किया गया है, अनुच्छेद 15 (3), अनुच्छेद 39 (ई) और (के तहत परिकल्पित बच्चों के प्रति राज्य के दायित्व के प्रत्यक्ष उल्लंघन में है) f), भारत के संविधान के अनुच्छेद 45 और अनुच्छेद 47 और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 ”।

NGO ने बताया की NRC से पहले ही लोगोकी पहचान करके उन्हें हाशिये पर रखा गया और विशिष्ट श्रेणीबद्ध कर दिया गया। इस घटना से साफ हो जाता है कि उन्ही दस्तावेज से उनके माता -पिता NRC से बहार है तो बच्चे क्यों। यहां तक कि उनके माता-पिता और रिश्तेदारों को भी शामिल किया गया था।


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