क्या मित्रो के व्यपार का आर्थिक दबाव प्रधान मंत्री के मुँह पर ताला लगा दिया ? गालवान में 423 मीटर अंदर तक चीनी की घुसपैठ - प्रेस रिव्यु – News

क्या मित्रो के व्यपार का आर्थिक दबाव प्रधान मंत्री के मुँह पर ताला लगा दिया ? गालवान में 423 मीटर अंदर तक चीनी की घुसपैठ – प्रेस रिव्यु

प्रधान मंत्री भारतीय बिज़नेस मैंन के साथ

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भारत और चीन के बीच इन दिनों सीमा विवाद और तनाव बढ़ता जा रहा है। महामारी के बीच बढ़ता तनाव दोनों देशों की आर्थिक राजनैतिज और सामाजिक विकास को प्रभावित कर रहा है।

15 जून को दोनों देश की सेनाओं के बीच हुए नरसंहार में भारत के जनरल सहित 20 जवान शहीद हुए। हालांकि इस दौरान चीन का विरोध देश में देखने को मिला।

लोग चीनी सामान का बहिष्कार किया गया और विपक्ष ने भी सत्ता पक्ष पर काफी प्रश्न उठाएं। वहीं घटना के बाद ज्यादातर लोगों की मांग है कि भारत सरकार बालाकोट की तरह महान काम चीन के साथ करें और चीन को मुंहतोड़ उसकी भाषा में जवाब दें।

हालांकि इस आक्रोश के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पक्ष और विपक्ष के सभी पार्टियों को बुलाकर मीटिंग की। मीटिंग के बाद प्रधानमंत्री ने एक बयान दिया जिसके बाद विपक्ष द्वारा काफी आलोचना करना पड़ा।

अपने एक बयान में प्रधानमंत्री जी ने कहा कि “भारत की जमीन पर किसी भी देश का कोई कब्जा नहीं हुआ है ना ही कोई घुसपैठ हुई है” इस बयान के बाद मानो विपक्ष को एक मौका मिला हो और उसने प्रधानमंत्री को ऊपर कई सवाल उठाएं।

जिसमे राहुल गाँधी ने ट्वीट करते हुए कहा था कि आखिर शहीद हुए सिपाही देश की धरती में नहीं तो कान्हा शहीद हुए क्या प्रधान मंत्री ने गलवान घाटी को चीन को दे दिया है।

घटना के बाद सैटेलाइट तस्वीरों द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि गलवान घाटी पर चीन ने अपना स्थाई बना कैंप बना लिया है।


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जिसके बाद अब पार्टी पर कई सवाल उठ रहे हैं एनडीटीवी लिखता है। गलवान घाटी में चीन की सेना ने भारतीय क्षेत्र में 423 मीटर अंदर तक घुसपैठ की है जो इस क्षेत्र में बीजिंग में अपने 1960 के दावे से काफी आगे हैं।

NDTV को मिली 25 जून की हाई रिजोल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों में भारतीय क्षेत्र के इस 423 मीटर के इलाके में चीन के 16 टेंट, तिरपाल, एक बड़ा शेल्टर और कम से कम 14 गाड़ियां नजर आ रही हैं। 1960 के चीनी दावे में बीजिंग के इस क्षेत्र में अपनी सीमा होने का सटीक अक्षांश और देशांतर सहित ‘भारत के अधिकारियों की रिपोर्ट’ और सीमा के प्रश्न पर पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना का उल्लेख किया गया है।’

व्यापारियों मित्रो के आर्थिक दबाव में सरकार?

भारत और चीन के बीच बढ़ता तनाव और व्यापार दोनों ही इस समय अहम हैं। भारत में जहाँ चीन के सामग्री का बहिष्कार किया जा रहा है वंही उच्च और बड़े घराने चीन के साथ व्यपार प्रस्ताव के मौसदे पर हस्ताक्षर कर रहे है।

19 जून को अडानी ग्रुप की कंपनी मुद्रा ने चीन के साथ क्लीन एनर्जी से जुड़े प्रोजेक्ट के लिए ईस्टर्न होप चीन की कमपनी के साथ 300 मिलियन डॉलर के व्यापार पर हस्ताक्षर किया।

इतना ही नहीं रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी के लिए भारी मुसीबत की खबर लंदन से आई है। लंदन के एक कोर्ट ने उन्हें चीन के तीन बैंकों को 717 मिलियन डॉलर (5000 करोड़ से ज्यादा) 21 दिनों के भीतर चुकाने का आदेश दिया है।

हाईकोर्ट ऑफ इंग्लैंड ऐंड वेल्स के कमर्शल डिविजन के जस्टिस नीगेल टीयरे ने कहा कि इस मामले में अनिल अंबानी की पसर्नल गारंटी है, जिसके कारण उन्हें रकम चुकानी होगी।

वंही लगातार बढ़ते पैट्रोल -डीजल के दाम अब जनता को रुला रहे है। इसी दौरान कई समाचारो में लिखा सरकार पेट्रोल -डीजल के दाम बढाकर अपने मित्रो को मुनाफा पहुँचाना चाहती है।


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डब्ल्यूटीओ के नियमों के मुताबिक, किसी देश की सरकार आयात या बिजनेस को बंद नहीं कर सकती। अगर ऐसा होता है तो फिर चीन भारत के व्यापार को रोकेगा।

ऐसे में ग्लोबलाइजेशन ही खत्म हो जाएगा। हमारे प्रधानमंत्री ने जो कहा, वह लोग समझ नही नहीं पाए। उन्होंने कहा था कि देश आत्मनिर्भर बने। उन्होंने बहिष्कार की बात नहीं की।


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