क्या अपनी नाकामी छिपाने के लिए बिहार सरकार ने लिया ऐसा फैसला ' बंद होंगे सारे क्वारंटीन सेंटर, स्टेशनों पर थर्मल स्क्रीनिंग भी नहीं।'

क्या अपनी नाकामी छिपाने के लिए बिहार सरकार ने लिया ऐसा फैसला ‘ बंद होंगे सारे क्वारंटीन सेंटर, स्टेशनों पर थर्मल स्क्रीनिंग भी नहीं।’

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कोरोना महामारी के प्रारम्भ से ही बिहार सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर चर्चा में रही है। प्रवासी मजदूरों और राजस्थान सहित अन्य जगह फंसे विद्यार्थियों को लाने के लिए जब सभी प्रदेश जोर -तोड़ पर मेहनत कर रहे थे।

तब बिहार सरक़ार ने ऐसा बयान दिया की काफी दिनों तक मीडिया में चर्चा होती थी। जाहिर है\ बिहार सरकार ने फैसला लिया है कि मंगलवार (2 जून, 2020) से प्रदेश लौटने वाले प्रवासियों का पंजीकरण या उन्हें क्वारंटाइन नहीं किया जाएगा।

सोमवार तक जो लोग राज्य में वापस लौट आए उनका पंजीकरण किया गया और 5000 से अधिक सेंटरों में उन्हें क्वारंटाइन किया गया है, जिनमें लगभग 13 लाख प्रवासी हैं। ये सभी क्वारंटाइन सेंटर 15 जून के बाद बंद कर दिए जाएंगे और तब तक इनमें मौजूद सभी प्रवासियों के 14 दिन की क्वारंटाइन अवधि पूरी हो जाएगी।

इसके अलावा रेलवे स्टेशनों पर थर्मल स्क्रीनिंग को भी बंद करने की तैयारी है, लेकिन हर स्टेशन पर मेडिकल सुविधा होगी ताकि लोगों को इलाज में आसानी हो सके।

राज्य सरकार ने ये फैसला ऐसे समय में लिया है जब बिहार लौटने वाले कई प्रवासियों को कोविड-19 की पुष्टि हुई है। सोमवार तक प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 3945 हो चुकी है। इसमें 2743 प्रवासी है जो तीन मई के बाद बिहार लौटे हैं।

इनमें महाराष्ट्र से लौटने वाले प्रवासियों में 677 को कोरोना की पुष्टि हुई है। इसके अलावा अन्य राज्यों से लौटे जिन प्रवासियों को कोरोना की पुष्टि हुई है उनमें दिल्ली के 628, गुजरात के 405 और हरियाणा के 237 लोग शामिल हैं। इसके अलावा यूपी, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और अन्य राज्यों से लौटने वाले प्रवासियों को भी कोरोना की पुष्टि हुई है।

बिहार आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रमुख सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि हमने 30 लाख से अधिक प्रवासियों को वापस लाकर सबसे बड़ी कवायद की है। हम सोमवार शाम से पंजीकरण बंद कर रहे हैं।

किसी भी मामले में अधिकतम लोग वापस आ गए हैं। उन्होंने कहा कि डोर-टू-डोर स्वास्थ्य निगरानी जारी रहेगी और चिकित्सा सुविधाएं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेवल I और लेवल II अस्पतालों तक समान रहेंगी।


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