क्या नेताओ के साथ SC ने भी खोई विश्वनीयता ? किसान नेता राकेश टिकैत, बोले- कानून वापसी होने तक घर वापसी भी नहीं। – News

क्या नेताओ के साथ SC ने भी खोई विश्वनीयता ? किसान नेता राकेश टिकैत, बोले- कानून वापसी होने तक घर वापसी भी नहीं।

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केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए कृषि कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। इसी के साथ चार सदस्य कमेटी का गठन भी किया गया है। मंगलवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि अब इस मामले में चार सदस्य कमेटी अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।

कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए किसानों ने कहा कि वह कमेटी नहीं, बल्कि इसका हल चाहते हैं. किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि जब तक कानून वापस नहीं होगा तब तक किसान घर वापस नहीं जाएंगे।

जानकारी के लिए बता दें कि इस कमेटी में कुल चार लोग शामिल होंगे, जिनमें भारतीय किसान यूनियन के भूपेंद्र सिंह मान, डॉ. प्रमोद कुमार जोशी, अशोक गुलाटी (कृषि विशेषज्ञ) और अनिल घनवंत हैं।

एमएसपी पर बनाया जाए कानून: टिकैत

उन्होंने आगे कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के प्रति जो सकारात्मक रुख दिखाया है। उसके लिए हम माननीय सर्वोच्च न्यायालय का आभार व्यक्त करते हैं। किसानों की मांग है कि कानून को रद्द कर व न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर कानून बनाया जाए।

जब तक यह मांग पूरी नहीं होती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का परीक्षण कर कल संयुक्त मोर्चा आगे की रणनीति की घोषणा करेगा।

जब तक कानून रद्द नहीं होगा, तब तक हमें फैसला मंजूर नहीं

फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आजतक के साथ बातचीत में किसान संघर्ष कमेटी के किसानों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जो आदेश आए हैं वह आपसे हमें पता चल रहा है। हमारे पास जब ऑर्डर आएगा हम देखेंगे कि सुप्रीम कोर्ट ने क्या डायरेक्शन दिया है।

जो स्टे वाली बात कही गई है और जो कमेटी वाली बात कही गई है, वह हमें पसंद नहीं है। एमएसपी को लेकर नया कानून बनेगा तभी मसला हल होगा भारत सरकार ने उस पर कुछ भी नहीं किया है। आंदोलन पीसफुल और सही तरीके से हो रहा है। तीनों कानून जब तक रद्द नहीं होंगे हमें कोई फैसला मंजूर नहीं है।

वहीं, आपको बता दें कि सुनवाई के दौरन सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि वकील ने पहले दिन ही हमने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि कुछ बाहरी तत्व विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए हैं और किसानों को गुमराह किया जा रहा है कि उनकी ज़मीन छीन ली जाएगी।


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