चीन ल्हासा से काठमांडू और लुम्बिनी तक रेलवे लाइन का निर्माण कर रहा तो वंही भारत में राम मंदिर ? – News

चीन ल्हासा से काठमांडू और लुम्बिनी तक रेलवे लाइन का निर्माण कर रहा तो वंही भारत में राम मंदिर ?

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भारत और चीन नियंत्रण रेखा को लेकर दोनों देशों में तनाव बढ़ता जा रहा है इस दौरान दोनों देशों की सेना में झड़प भी हुई जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हुए। हिंसक झड़प के बाद भारत ने चीन के साथ चल रहे कई व्यापारिक मसौदे और प्रोजेक्ट के कॉन्ट्रैक्ट को रद्द कर दिया है।

हालंकि दोनों देशों के तनाव के बीच भारत में राफेल फाइटर जेट को मीडिया ने बड़ा मुद्दा बनाया वंही भारतीय मीडिया में कोरोना, बाढ़ बेरोजगारी और भुखमरी जैसे मुद्दों का जिक्र नहीं है। जबकि राम मंदिर पर बहस चल रहा है।

राफेल के बाद भारत अपने को मजबूत बताकर जंहा सीना चौड़ा कर रहा है वंही चीन अब नेपाल के साथ मिलकर भारत को एक और झटका देने वाला है।

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दरसल भारत से चल रहे सीमा तनाव के बीच चीन ने नेपाल में 30 करोड़ डॉलर की रेल परियोजना पर काम शुरू कर दिया है। रणनीतिक रूप से अहम ये रेलवे लाइन ल्हासा से काठमांडू तक जाएगी और फिर भारत-नेपाल सीमा के नजदीक लुम्बिनी से भी इसे जोड़ा जाएगा।

चीन की मीडिया ने रेलवे प्रोजेक्ट के सर्वे की तस्वीरें जारी की हैं। तस्वीरों में एक टीम कॉरिडोर साइट का मुआयना करती नजर आ रही है। ऐसे वक्त में, जब नेपाल और भारत के बीच सीमा तनाव चल रहा है, चीन अपनी परियोजनाओं के जरिए नेपाल में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

सोमवार को चीन ने पाकिस्तान, नेपाल और अफगानिस्तान के साथ वर्चुअल बैठक कर कोरोना महामारी और बेल्ट एंड रोड परियोजना पर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की थी। चीन-नेपाल के बीच रेलवे लाइन की योजना 2008 में बनी थी लेकिन तब से इसमें कोई बहुत प्रगति नहीं हुई थी।

हालांकि, नेपाल-भारत के मौजूदा सीमा विवाद के बीच चीन ने कॉरिडोर पर काम तेज कर दिया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की डेडलाइन 2025 है।

घटनाक्रमों पर नजर रख रहे भारतीय सूत्रों के मुताबिक, अभी परियोजना का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है लेकिन सर्वे शुरू कर दिया गया है।

चीन ने 2008 में इस परियोजना की नींव रखी थी और ये तय हुआ था कि रेलवे कॉरिडोर के जरिए ल्हासा से शिगास्ते को जोड़ा जाएगा और फिर इसका विस्तार नेपाल सीमा के नजदीक केरूंग तक किया जाएगा. आखिरी चरण में इस रेलवे लाइन को काठमांडू और बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी तक लाया जाएगा।

हालांकि, इस बड़ी परियोजना की अनुमानित लागत को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं क्योंकि अभी से इसकी लागत 30 करोड़ डॉलर से ज्यादा पहुंच चुकी है।

इस परियोजना में कई सुरंगें और पुल बनाए जाने हैं जिसकी वजह से ये काफी जटिल काम है। सूत्रों का कहना है कि चीन चाहता था कि नेपाल इस परियोजना की आधी लागत का वहन करे लेकिन इससे प्रोजेक्ट में देरी होती गई।

कई लोगों का मानना है कि रेलवे लाइन से पहले चीन नेपाल में दूसरी सड़क परियोजनाओं को पूरा करेगा क्योंकि वो उसके लिए ज्यादा आसान और सस्ता होगा।


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