बिहार : जहां अनाज मांगने पर मिली जेल। अंगूठे और कार्ड के चक्कर में लोग भूख से मर रहे है – News

बिहार : जहां अनाज मांगने पर मिली जेल। अंगूठे और कार्ड के चक्कर में लोग भूख से मर रहे है

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राज्य की राजधानी पटना से तकरीबन 80 किलोमीटर दूर मुजफ्फरपुर में 9 लोग इसी अनाज वितरण को लेकर जेल में हैं। मुजफ्फरपुर के औराई प्रखंड के अतरार गांव के 9 लोग जेल में हैं।

अतरार के ग्रामीण बताते हैं कि स्थानीय डीलर की अनाज कालाबाजारी की शिकायत ब्लॉक स्तर पर की गई थी जिसके बाद अनाज को जब्त करके स्थानीय स्कूल में रखा गया था।

लेकिन 19 मई को प्रशासनिक अधिकारियों ने आकर उस अनाज को दूसरी जगह ले जाने की कोशिश की। जिसके बाद गांव ने पुलिस और ग्रामीणों के बीच में भिडंत हुई। जो बाद में पुलिस की लाठीचार्ज में तब्दील हो गया।

अतरार गांव के रमाशंकर चौधरी बिहार सरकार के अनुसूचित जाति/ जनजाति अत्याचार निवारण पर्यवेक्षण समिति के सदस्य है। जिनका कहना है –

“गांव में भूख से तीन लोगों की मौत हो चुकी है। तकरीबन 200 की संख्या में पुलिसकर्मी थे और उन लोगों ने बुजुर्गो, गर्भवती महिलाओं, बच्चों को पीटा और ग्रामीणों के मोबाइल तक छीनकर ले गई। अब पुलिस ने 9 लोगों को जेल भेज दिया है जिसमें नाबालिग भी है। हमने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बीडीओ को निलंबित करने, घटना की जांच और निर्दोषों को जेल से रिहा करने की मांग की है। “

Pic Situ Tiwari BBC

पीयूसीएल यानी पब्लिक यूनीयन ऑफ सिविल लिबर्टीज की तीन सदस्यीय टीम भी जांच के लिए अतरार गांव गई थी। टीम के सदस्य शाहिद कमाल के मुताबिक,

“अतरार की स्थिति दयनीय है। वहां स्थानीय लोगों और मुखिया के बीच तनातनी के चलते अनाज नहीं बट पा रहा है. सरकार को चाहिए कि वहां संवेदनशील तरीके से हस्तक्षेप करके पीडीएस अनाज का वितरण सुनिश्चित करें.”

गूठा नहीं लग रहा है तो डीलर अनाज नहीं दे रहा है :

रोहतास के दिनारा ब्लॉक के बरूना गांव की प्रतिमा देवी को दो महीने से राशन नहीं मिल रहा है। खेत मजदूर करने वाले रामबलि पासवान और प्रतिमा देवी के परिवार में 16 सदस्य है. प्रतिमा कहती हैं, “अंगूठा नहीं लग रहा है तो डीलर अनाज नहीं दे रहा है। खाए पिए के बहुत दिक्कत है। “ रोहतास से दूर भोजपुर के फतेहपुर मठियां गांव की अंजू देवी की भी यहीं परेशानी झेल रही है। अंजू देवी के परिवार को मई माह का राशन नहीं मिला है।

गौरतलब है कि यूपीए की दो योजनाएं, मनरेगा और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून, कोरोना काल में गरीबों तक राहत पहुंचाने का बहुत प्रभावी जरिया साबित हो रहे है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (एनएफएसए) 2013 में बना। जिसके तहत 2 रुपये प्रति किलो गेहूं और 3 रूपए किलो चावल गरीबों को देना था।

भोजन अधिकार अभियान से जुड़े रूपेश कुमार बताते है, ” इस कानून के तहत बिहार की 85 फीसदी आबादी को इस कानून के तहत सुरक्षा मिलनी चाहिए. लेकिन सरकार 15 फीसदी आबादी को छांटने की बजाए 85 फीसदी को गिनने में लगी हुई है, जो उल्टा काम है।


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