बाँदा : इलाज तो हो गया अब घर कैसे जाएं मरीज

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न प्रशासन कोई मदद कर रहा है न स्वास्थ्य विभाग

लॉक डाउन के बाद गरीबों, मजदूरों, बीमारों पर टूटा कहर

हर तरह के सरकारी दावों की खुली पोल

बांदा – जब से देश मे लॉक डाउन घोषित हुआ है देश के गरीबों, मजदूरों किसानों, और मरीजों पर मानो कहर टूट पड़ा है ये गरीब अपने बच्चों और महिलाओं के साथ कई कई सौ किलोमीटर पैदल चल कर घर जाने को मजबूर है इन गरीबो में मरीजों की हालत बहुत खराब दिखाई दे रही है ये मरीज अपनी परेशानियों से इतने परेशान हो गए हैं कि अब इनकी जबान सूख गई है और इनके आंसू इनके दिल का दर्द बयां करने लगे है ।


ऐसे कई मामले आज जिला अस्पताल में देखने को मिले जहाँ मरीज फूट फूट कर रो रहे हैं और उनके आंसू पोंछने वाला कोई नज़र नहीं आ रहा ।


जिला अस्पताल में कई दिन से भर्ती सिंगपुर के निवासी 14 वर्षीय कमलेश को आज छुट्टी दे दी गई कमलेश के पिता राम प्रशाद कमलेश को ले कर अस्पताल के बाहर बैठ गए कई बार एम्बुलेंस को फोन किया तो उनको जवाब मिला कि घर छोड़ने की जुम्मेदारी हमारी नहीं है

राम प्रसाद के पास न तो पैसे थे न ही कोई साधन उसकी इस मजबूरी ने आखिर उसकी हिम्मत तोड़ दी और बाप बेटे दोनो अपनी बेबसी पर फूट फूट कर रोने लगे ।
इसी तरह बबेरू के राजू को भी आज कई दिन भर्ती रखने के बाद छुट्टी देते हुए 5 दिन बाद आने को कहा गया अभी राजू की जांचें भी पूरी नहीं हो पाईं उसको मुंह से खून आता है अभी वो बीमार है इस के बावजूद उसको अस्पताल से छोड़ दिया गया वो सड़क पर बैठा है पैदल चल भी नहीं सकता ।
पैलानी निवासी कोमल को भी छुट्टी दे दी गई कोई साधन न होने की वजह से वो अभी भी अस्पताल के बिस्तर में पड़ी है ।
इस तरह के कई मामले सामने आ रहे है आज कुछ कांग्रेस के नेताओं ने अस्पताल पहुंच कर इन मरीजों की समस्याएं सुनी और जिले के अधिकारियों से बात की लेकिन किसी ने इन मरीजों की कोई व्यवस्था नहीं की सब एक दूसरे से बात करने के लिए कहते रहे ।
इन सारी परेशानियों से लगता है कि अगर ये गरीब कोरोना से बच भी गए तो ये अन्य परेशानियों से मर जायेंगे ।


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