बाँदा: CAA और NRC का खौफ, नोटबंदी की तरह फिर से लाइन में लगेगी जनता

बाँदा: CAA और NRC का खौफ, नोटबंदी की तरह फिर से लाइन में लगेगी जनता

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बाँदा : जब से सीएए लागू हुआ है, और एनआरसी को लेकर बार- बार सरकार के लोग खुद जनता में डर पैदा कर रहे है। सीएए और एनआरसी को लेकर पूरे देश मे कोहराम मचा है।

एक तरफ जनता विरोध प्रदर्शन कर रही है, वही दूसरी तरफ इसके समर्थन में रैलिया निकली जा रही है। ऐसा लग रहा है जैसे देश मे कोई मुद्दा ही न बचा हो।

जनता ये सब समझ रही है कि सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए एक बार फिर हमें सारे मुद्दों से भटका कर नोटबंदी की तरह लाइन लगाने में लगी है ताकि हम सरकार से उसके द्वारा किये गए वादों को भूल जाएं ।

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सरकार में बैठे लोग एक तरफ समर्थन में रैलियां निकाल कर सी ए ए और एन आर सी के प्रति जागरूकता लाने की बात करते हैं, और दूसरी तरफ खुद ही तरह तरह के बयान जारी करके जनता को डराते हैं जिसकी वजह से जनता अब सरकार पर भरोसा नहीं कर पा रही है ।

यही कारण है कि पूरे देश मे विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। लेकिन डरी हुई जनता ने अब अपने और अपने परिवार के जन्म, मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अपने काम धंधों को छोड़ कर नगर पालिका और प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काटना शुरू कर दिया है।

आज कल ऐसे लोगों की एक भीड़ रोज नगर पालिका पहुंच रही है पिछले तीन महीनों में बांदा नगर पालिका में लगभग दो हज़ार लोग आवेदन कर चुके है, और प्रमाण पत्र के लिए चक्कर काट रहे है।

नगर पालिका कर्मचारियों के मुताबिक तीन माह पहले जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कभी- कभी कोई आता था। लेकिन जब से सीएए लागू हुआ और एनआरसी के बारे में देश भृम की स्थिति बनी है तब से रोज सैकड़ों लोग जन्म, मृत्यु, प्रमाण पत्र बनवाने नगर पालिका पहुंच रहे हैं जिनमे महिलाये बच्चे बूढ़े सब शामिल है।

अचानक इस भीड़ की वजह से जहां नगर पालिका कर्मचारियों का काम बढ़ गया है तो वहीं इन कर्मचारियों की ऊपरी कमाई का रास्ता भी खुल गया है। अपने काम धंधे को छोड़ कर जो गरीब अपना अपने परिवार का जन्म, मृत्यु, प्रमाण पत्र बनवाने आ रहा है उससे ये कर्मचारी पैसे की मांग कर रहे हैं ।
नगर पालिका प्रमाण पत्र बनवाने आने वाले लोगों ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार मंहगाई, बेरोज़गारी गिरती विकास दर को छोड़ कर ऐसे मुद्दों में हमे उलझाना चाहती है।

जिससे हम सरकार से उसके द्वारा किये गाये वादों के बारे में न पूँछें। आदमी फिर से एक बार नोटबंदी की तरह लाइन में लग जाए , और सरकार अपनी नाकामियों को आसानी से छुपा सके।


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