उत्तर प्रदेश शर्मसार : बेटे को बुखार था, डॉक्टरों ने बच्चे को छूने से मना कर दिया। मासूम की मौत के बाद बेटे के शव से लिपटकर रोटा पिता। – News

उत्तर प्रदेश शर्मसार : बेटे को बुखार था, डॉक्टरों ने बच्चे को छूने से मना कर दिया। मासूम की मौत के बाद बेटे के शव से लिपटकर रोटा पिता।

The Netizen News

उत्तर प्रदेश के कन्नौज (Kannauj) में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. कन्नौज के जिला अस्पताल के बाहर रविवार शाम एक दर्दनाक नज़र देखने को मिला।

यहां एक शख्स के अपने एक साल के बच्चे के शव से लिपटकर अस्पताल में रोने का वीडियो सामने आया है। वीडियो में एक शख्स अपने मृत बच्चे को सीने से चिपकाये फूट-फूटकर रोता हुआ नजर आ रहा है। पास ही बैठी उसकी पत्नी भी बुरी तरह रो रही है। जिसने भी यह नजारा देखा उसकी आंखों में आंसू आ गए।

पीड़ित पिता ने अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से बच्चे की मौत होने का आरोप लगाया है। बच्चे के पिता का आरोप है कि अस्पताल ने उसके बच्चे का वक़्त पर इलाज नहीं किया जिससे उसकी मौत हो गई।

यूपी की स्वास्थ्य सेवाओं से संवेदना और मानवता मानो खत्म हो चुकी है! कन्नौज में तेज बुखार से पीड़ित बच्चे को इलाज ना मिलने से अपनी जान गंवानी पड़ी, अत्यंत दुखद! गंभीर हालत के बावजूद चिकित्सकों पर भर्ती ना करने का आरोप। शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना! दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई।

Posted by Samajwadi Party on Sunday, June 28, 2020

लेकिन अस्पताल का कहना है कि बच्चा वायरल इन्सेफेलाइटिस का शिकार था और बहुत गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। उसे इमरजेंसी में भर्ती कर डॉक्टर से इलाज कराने की कोशिश की गई लेकिन आधे घंटे में ही उसकी मौत हो गई।

बच्चे की मौत से दुखी पिता ने बताया कि उनके बेटे को बुखार और गले में सूजन थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल के डॉक्टरों ने बच्चे को छूने से मना कर दिया और कानपुर में किसी बड़े अस्पताल में लेकर जाने को कहा। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने इसका वीडियो बनाने शुरू कर दिया, जिसके बाद बच्चे को इमरजेंसी रूम में जांच के लिए ले जाया गया।

बच्चे के माता पिता कन्नौज के मिश्री गांव के रहने वाले हैं। उसके पिता प्रेमचंद का कहना है कि ज़िला अस्पताल में कोई डॉक्टर उसके बच्चे का इलाज करने को तैयार नहीं था।

वे कह रहे थे कि बच्चे को इलाज के लिए कानपुर ले जाओ। जब वो बाहर परेशान घूम रहा था तभी कुछ मीडिया वाले आ गए। उसके बाद डॉक्टरों ने उसे भर्ती किया लेकिन फौरन ही उसकी मौत हो गई। प्रेमचंद का कहना है कि वह ग़रीब आदमी है इसलिए वो अपने बच्चे को कानपुर इलाज के लिए नहीं ले जा सका।

अस्पताल के डॉक्टरों और जिला प्रशासन ने परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बच्चे को इमरजेंसी रूम में प्राथमिक उपचार दिया गया था लेकिन उसकी हालात काफी गंभीर थी और उनके प्रयासों के बावजूद 30 मिनट के अंदर बच्चे की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि इसमें लापरवाही को कोई मामला नहीं है।


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